रायपुर। रायपुर में महतारी वंदन योजना के हजारों हितग्राहियों को अपात्र बताए जाने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस का कहना है कि जिन महिलाओं को सरकार ने पात्र मानकर योजना में शामिल किया था, उनके खातों में करीब ढाई साल तक हर महीने 1 हजार रुपए भेजे गए। अब दोबारा पात्रता जांच के बाद इन्हीं में से कई महिलाओं से पहले मिली रकम वापस जमा करने को कहा जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने इसे महिलाओं के साथ अन्याय बताया है। उन्होंने सरकार से पूछा कि अगर ये महिलाएं पात्र नहीं थीं तो इन्हें योजना में किस आधार पर शामिल किया गया। ढाई साल तक इनके खातों में राशि किस जांच के आधार पर भेजी गई।

पात्रता जांच में 27 हजार अपात्र मिले
महतारी वंदन योजना में पात्रता की दोबारा जांच के दौरान बड़ी संख्या में हितग्राहियों को अपात्र पाया गया। जुलाई 2026 में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में करीब 27 हजार अपात्र मामले मिले थे। इन मामलों में करीब 9 करोड़ रुपए की राशि वापस लिए जाने की जानकारी दी गई थी। इनमें रायपुर में 2,883 और रायगढ़ में 1,017 अपात्र मामले बताए गए थे।
4.17 लाख रिकॉर्ड की जांच, 542 महिलाएं अपात्र
बिलासपुर में हालिया जांच के दौरान महतारी वंदन योजना के 4 लाख 17 हजार 902 हितग्राहियों के रिकॉर्ड की जांच की गई। इनमें 542 महिलाएं अपात्र पाई गईं। विभाग के मुताबिक करीब 30 लाख रुपए वापस लिए जा चुके हैं।
बिलासपुर में योजना की 31 किस्तों के जरिए अब तक करीब 1,216 करोड़ रुपए हितग्राहियों के खातों में पहुंच चुके हैं। ऐसे में सामने आए अपात्र मामलों ने शुरुआती पात्रता जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस बोली- शुरुआती जांच में गलती कहां हुई
धनंजय ठाकुर ने कहा कि योजना में शामिल करने से पहले सरकार ने महिलाओं से आवेदन लिए, दस्तावेजों की जांच की और उन्हें पात्र मानकर भुगतान किया। अगर बाद में कोई हितग्राही अपात्र पाया गया तो सरकार को यह भी बताना चाहिए कि शुरुआती जांच में गलती कहां हुई।
रकम वापसी के लिए दबाव का आरोप
धनंजय ठाकुर ने आरोप लगाया कि कई महिलाओं पर रकम वापस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि कुछ महिलाएं रकम लौटाने के लिए कर्ज लेने या जेवर गिरवी रखने तक की स्थिति में पहुंच रही हैं।
अपात्र करने का आधार सार्वजनिक करने की मांग
कांग्रेस ने मांग की है कि जिन महिलाओं को अपात्र बताया गया है, उन्हें किस आधार पर अपात्र किया गया, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही जिन मामलों में सरकारी जांच के बाद पात्र मानकर भुगतान किया गया था, वहां रकम लौटाने से पहले संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाए।