CG: 90 के दशक का गृह निर्माण ऋण घोटाला, 28 साल बाद EOW के हत्थे चढ़े दो मुख्य आरोपी

रायपुर: राजधानी रायपुर में दशकों पुराने करोड़ों रुपये के सरकारी गबन मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। कोर्ट में पेशी के बाद दोनों को 25 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

कागजों पर ही बना दिए 186 मकान

यह पूरा मामला साल 1995 से 1998 के बीच का है। उस वक्त जरूरतमंदों को घर देने के नाम पर एक सरकारी योजना के तहत भारी धांधली की गई थी। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने 186 फर्जी लाभार्थियों के नाम पर 1-1 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया। इस तरह कुल 1 करोड़ 86 लाख रुपये की राशि जारी करवा ली गई।

सत्यापन में खुला फर्जीवाड़े का राज

घोटाले की परतें तब खुलीं जब विभाग ने जमीन पर जाकर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया। जिन स्थानों पर मकान बनने का दावा किया गया था, वहां न तो कोई निर्माण मिला और न ही उन लाभार्थियों का कोई पता चला जिनके नाम पर पैसा निकाला गया था। पूरी योजना सिर्फ फाइलों और फर्जी दस्तावेजों तक सीमित थी।

फर्जी प्रमाण पत्रों से सिस्टम को दिया चकमा

EOW की जांच के अनुसार, आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से इस घोटाले को अंजाम दिया:

  • कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज और प्रमाण पत्र तैयार किए गए।
  • बिना किसी जमीनी जांच के ऋण स्वीकृत कराए गए।
  • हैरानी की बात यह है कि निर्माण कार्य न होने के बावजूद फर्जी ‘उपयोगिता प्रमाण पत्र’ (Utilization Certificate) भी जारी कर दिए गए।

2 आरोपी मृत, अब रिमांड में होंगे खुलासे

इस मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों की मौत हो चुकी है, जिससे जांच की कड़ी जोड़ने में चुनौती आ रही थी। गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी लंबे समय से नोटिस मिलने के बावजूद गायब थे। अब पुलिस रिमांड के दौरान उनसे कड़ी पूछताछ की जाएगी ताकि यह पता चल सके कि इस सिंडिकेट में शासन-प्रशासन के और कौन से लोग शामिल थे।

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