जॉब के नाम पर फ्रॉड: अब सलाखों के पीछे कटेगी आरोपी पति-पत्नी की रातें… सरकारी नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी का मामला कैसे खुला?

दुर्ग-भिलाई। दुर्ग पुलिस ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने नौकरी लगाने के नाम पर आवेदकों से बड़ी राशि वसूली थी, लेकिन नौकरी नहीं लगाई और रकम भी वापस नहीं की। पुलिस ने इस मामले में आरोपी अनिता सिंह और उनके पति नरेंद्र सिंह ठाकुर को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

मामला इस प्रकार है कि प्रहलाद सिंह सिकरवार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि आरोपीगण अनिता सिंह, नरेंद्र सिंह और उनके साथी गिरीश यादव और भूपेश कुमार सोनवानी ने उनके बेटे नवीन सिंह और उनके साथी बुद्धेश्वर से मंत्रालय रायपुर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर क्रमशः 4,25,000 रुपये और 1,70,000 रुपये की राशि प्राप्त की। आरोपियों ने धोखाधड़ी से इन पैसों को वसूला और बाद में नौकरी न दिलाने पर रुपये वापस मांगने पर, अनिता सिंह ने बैंक का चेक दिया जो बाउंस हो गया। इसके बाद आरोपी लगातार उनके साथ घुमाते रहे और रकम वापस करने का वादा किया, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

पुलिस ने इस मामले को गंभीर मानते हुए धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 34 (साझी मंशा) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया और विवेचना शुरू की। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने न केवल धोखाधड़ी की बल्कि झूठे दस्तावेज भी तैयार किए और लोगों को झांसा दिया।

पुलिस अधीक्षक जितेंद्र शुक्ला के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर त्वरित कार्रवाई की गई और फरार आरोपी अनिता सिंह और नरेंद्र सिंह ठाकुर को रायपुर से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों से जुड़ी कई अहम जानकारियां मिलीं और उन्होंने अपना जुर्म स्वीकार किया। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 34 (साझी मंशा), धारा 467 (कागजों की जालसाजी), धारा 468 (जालसाजी का उद्देश्य) और धारा 471 (फर्जी दस्तावेजों का उपयोग) के तहत केस दर्ज किया है।

गिरफ्तार आरोपी:

  • अनिता सिंह उर्फ अन्नू (उम्र 62 साल)
  • नरेंद्र सिंह ठाकुर (उम्र 66 साल)

सभी आरोपी रायपुर जिले के पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र से संबंधित हैं। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है और न्यायिक रिमांड पर भेजा है। इस कार्यवाही में निरीक्षक आनंद शुक्ला, सउनि रामचंद्र कंवर, आरक्षक लोकेश सलाम, लक्ष्मीनारायण यादव और अन्य पुलिसकर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

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