CGPSC भर्ती घोटाला : CBI ने कोर्ट में पेश की 400 पन्नों की चार्जशीट, 29 लोगों को बनाया आरोपी, सबसे पहले टामन सोनवानी के घर पहुंचे प्रश्नपत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती परीक्षा 2021 घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जांच पूरी करते हुए करीब 400 पन्नों की फाइनल चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी है. इस चार्जशीट में कुल 29 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें अधिकारी, उद्योगपति, चयनित अभ्यर्थी और एक कोचिंग संचालक भी शामिल है.

CBI का कहना है कि इस मामले को सुनियोजित साजिश के तहत अंजाम दिया गया, जिसमें प्रश्नपत्र लीक से लेकर चयन प्रक्रिया तक गंभीर अनियमितताएं की गईं. CBI की जांच में सामने आया है कि एक कोचिंग संचालक ने महासमुंद जिले के बारनवापारा क्षेत्र के एक होटल में कुछ संदिग्ध अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले विशेष तैयारी करवाई.

एजेंसी का दावा है कि इस संचालक के पास CGPSC 2021 का प्रश्नपत्र पहले से मौजूद था और उसी के आधार पर अभ्यर्थियों को टारगेटेड तरीके से पढ़ाया गया. इससे पहले भी CBI इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश कर चुकी है. फिलहाल 12 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि उत्कर्ष चंद्राकर फरार है, जिसकी भूमिका परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी कराने की बताई गई है.

चार्जशीट के अनुसार, इस घोटाले में तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, बजरंग पावर एंड इस्पात के तत्कालीन निदेशक श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार सहित कई प्रभावशाली नाम शामिल हैं. इन सभी पर पद और रसूख का दुरुपयोग कर अपने करीबी लोगों को चयन सूची में शामिल कराने का आरोप है.

CBI का दावा है कि उद्योगपति और राजनीतिक प्रभाव वाले परिवारों के कई अभ्यर्थियों को डिप्टी कलेक्टर जैसे अहम पदों पर नियुक्त किया गया. जांच में यह भी सामने आया कि CGPSC 2021 की टॉप-20 चयन सूची में 13 से अधिक अभ्यर्थी किसी न किसी बड़े अधिकारी, नेता या कारोबारी के रिश्तेदार थे. इसी आधार पर चयन प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद यह मामला CBI को सौंपा गया. एजेंसी का कहना है कि तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक की भूमिका बेहद अहम रही और प्रश्नपत्र लीक कराने से लेकर चयन तक आंतरिक मिलीभगत के ठोस सबूत मिले हैं.

परीक्षा के प्रश्नपत्र सबसे पहले टामन सिंह सोनवानी के घर पहुंचे
CBI के अनुसार, परीक्षा के प्रश्नपत्र सबसे पहले टामन सिंह सोनवानी के घर तक पहुंचे, जहां से उन्हें अन्य लोगों को दिया गया. इसके बाद उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर के जरिए लीक हुआ पेपर एक निजी कंपनी के निदेशक तक पहुंचा. आरोप है कि उसी लीक प्रश्नपत्र से तैयारी कर कुछ अभ्यर्थियों का चयन सुनिश्चित किया गया. जांच में यह भी खुलासा हुआ कि प्रश्नपत्र छापने का काम कोलकाता की एक प्रिंटिंग कंपनी को दिया गया था और वहां से पर्चे रायपुर लाकर उन्हें अवैध तरीके से कॉपी किया गया.

2020 से 2021 के बीच हुआ घोटाला
CBI का कहना है कि यह पूरा घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है, जिसमें पारदर्शिता को दरकिनार कर अपने लोगों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर बैठाया गया. योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी की गई और चयन सूची को मनमाने ढंग से प्रभावित किया गया. प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंपी थी, जिसके बाद कई छापेमारियों में महत्वपूर्ण दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए गए.

171 पदों पर की गई थी भर्ती
CGPSC परीक्षा 2021 में कुल 171 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी. फरवरी 2022 में प्रारंभिक परीक्षा हुई, जिसमें हजारों अभ्यर्थी शामिल हुए. इसके बाद मई 2022 में मुख्य परीक्षा और मई 2023 में अंतिम चयन सूची जारी की गई. अब फाइनल चार्जशीट दाखिल होने के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में जल्द ही ट्रायल शुरू होने की संभावना जताई जा रही है.

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