“सूक्ष्म उद्योगों के लिए हो अलग पॉलिसी, संयुक्त नीति से नहीं हो रहा विकास” – MSME समिति की बैठक में रतन दासगुप्ता का बड़ा सुझाव

रायपुर/भिलाई। छत्तीसगढ़ के सूक्ष्म उद्योगों (Micro Industries) के कायाकल्प और उन्हें नई दिशा देने के लिए अब एक पृथक पॉलिसी की मांग उठने लगी है। रायपुर स्थित उद्योग भवन में आयोजित MSME सुझाव समिति की प्रथम बैठक में भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) एंसिलरी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष रतन दासगुप्ता ने उद्योगों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कई क्रांतिकारी सुझाव दिए।

समिति के सदस्य के रूप में अध्यक्ष दासगुप्ता ने स्पष्ट किया कि सूक्ष्म और मध्यम उद्योगों के लिए वर्तमान में एक ही संयुक्त पॉलिसी प्रभावी है, लेकिन सूक्ष्म उद्योगों की जरूरतें अलग हैं। इसलिए इनके सर्वांगीण विकास के लिए एक स्वतंत्र पॉलिसी लाना अनिवार्य है।

बिजली और टैक्स में राहत: सूक्ष्म उद्योगों को दी जाने वाली बिजली की दर में ₹2 प्रति यूनिट की कटौती की जाए और उन्हें स्टाम्प ड्यूटी से पूरी तरह मुक्त किया जाए।

लीज रेंट और नवीनीकरण: संगठनात्मक बदलाव होने पर अगले 10 वर्षों तक लीज रेंट वर्तमान दर पर ही स्थिर रखा जाए। साथ ही, लीज नवीनीकरण के आवेदनों का निपटारा अधिकतम 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित हो।

अनिवार्य खरीदी (Local Purchase): जिस तरह भिलाई इस्पात संयंत्र स्थानीय उद्योगों से खरीदारी करता है, उसी तर्ज पर प्रदेश के अन्य सरकारी और निजी वृहद उद्योगों के लिए स्थानीय सूक्ष्म उद्योगों से कल-पुर्जे खरीदना अनिवार्य किया जाए।

नगरनार प्लांट से जुड़ाव: जगदलपुर स्थित नगरनार स्टील प्लांट को भी भिलाई की एंसिलरी इकाइयों से कल-पुर्जे खरीदने चाहिए, क्योंकि इन इकाइयों के पास इस्पात संयंत्रों की मशीनरी का लंबा अनुभव है।

दोहरे टैक्स का विरोध: नगर निगम द्वारा उद्योगों को भेजे जा रहे ‘निर्यात कर’ के नोटिसों को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई, इसे उन्होंने ‘दोहरा करारोपण’ बताया।

“छत्तीसगढ़ स्टील हब है और भिलाई इस्पात संयंत्र इसकी रीढ़ है। स्थानीय सूक्ष्म उद्योग न केवल संयंत्र को मजबूती देते हैं, बल्कि स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार भी उपलब्ध कराते हैं। उनकी समस्याओं का समाधान राज्य की प्रगति के लिए आवश्यक है।” — रतन दासगुप्ता, अध्यक्ष, बीएसपी एंसिलरी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

पोर्टल में पारदर्शिता की मांग
अध्यक्ष दासगुप्ता ने सुझाव दिया कि अनुदान या छूट के लिए दिए गए ऑनलाइन आवेदनों की स्थिति पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। पोर्टल पर यह स्पष्ट दिखना चाहिए कि आवेदन किस अधिकारी के पास लंबित है। इसके अलावा, उन्होंने भिलाई औद्योगिक क्षेत्र की बदहाल सड़कों, नालियों और स्ट्रीट लाइट की समस्या के त्वरित समाधान की भी अपील की।

समिति के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल एवं अन्य पदाधिकारियों ने इन सुझावों को गंभीरता से सुना। उम्मीद जताई जा रही है कि इन बिंदुओं पर अमल होने से राज्य के सूक्ष्म उद्योगों को एक नई ऊर्जा मिलेगी।

खबरें और भी हैं...
संबंधित

जशपुर वनमण्डल ने रचा इतिहास : गोल्डन बुक ऑफ...

रायपुर। पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी के क्षेत्र में जशपुर वनमण्डल ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए एक ही दिन में 2 लाख से...

CG News : कपड़े सुखाने के के दौरान हादसा,...

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कर्रा में एक हृदयविदारक हादसे में पति-पत्नी की करंट लगने से मौत हो...

CG News: खाना देने में हुई देरी, शराबी बेटे...

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। जिले के भांसी थाना क्षेत्र अंतर्गत...

चिटफंड कंपनी का संचालक गिरफ्तार, पैसा दोगुना करने का...

मनेंद्रगढ़। एमसीबी जिले की चिरमिरी पुलिस ने पैसा दोगुना करने का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले चिटफंड कंपनी संचालक को बिलासपुर...