नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ के कद्दावर नेता और सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में किसानों के हितों को लेकर पुरजोर आवाज़ उठाई है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) की छत्तीसगढ़ राज्य परामर्शदात्री समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने केंद्र सरकार से देश और प्रदेश में फसलों की खरीद, भंडारण क्षमता और अनाज परिवहन की पारदर्शी व्यवस्था पर विस्तृत जवाब माँगा।
सदन में पूछे गए उनके सवालों के जवाब में सरकार ने बताया कि छत्तीसगढ़ में बीते पांच वर्षों में धान खरीदी के मूल्य में 102% की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।

छत्तीसगढ़: धान का कटोरा अब समृद्धि का केंद्र
सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा रखे गए आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं:
| विवरण | वर्ष 2020-21 | वर्ष 2024-25 | वृद्धि (%) |
| खरीदी का मूल्य | ₹13,419.90 करोड़ | ₹27,009.44 करोड़ | 102% |
| खरीद की मात्रा | 71.08 LMT | 116.42 LMT | 63.7% |
सांसद अग्रवाल ने कहा— “राष्ट्रीय खाद्य भंडार में छत्तीसगढ़ का योगदान हमारी खाद्य सुरक्षा का स्तंभ है। हमने न केवल खरीद मूल्य को दोगुना किया है, बल्कि IT-समर्थित मॉडल लागू कर यह सुनिश्चित किया है कि किसान के पसीने की हर बूंद का सही मोल मिले।”
भंडारण और लॉजिस्टिक्स: IIT दिल्ली की तकनीक से सुधरेगी व्यवस्था
अनाज की बर्बादी रोकने और उसे सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने सदन में आधुनिक ब्लूप्रिंट साझा किया:
- रूट ऑप्टिमाइजेशन: अनाज को कम समय और कम लागत में पहुँचाने के लिए IIT दिल्ली (FITT) के साथ साझेदारी की गई है। फरवरी 2025 से एक डिजिटल टूल लागू किया गया है जो रेलवे के साथ मिलकर सटीक माल ढुलाई सुनिश्चित करता है।
- रेलवे का उपयोग: खाद्यान्न परिवहन के लिए 80% से अधिक रेल मार्ग का उपयोग किया जा रहा है।
- छत्तीसगढ़ की क्षमता: प्रदेश में वर्तमान भंडारण क्षमता 32.41 LMT है। FSD दुर्ग और FSD अर्जुन जैसे केंद्रों को ‘परिसंपत्ति मुद्रीकरण योजना’ के तहत अपग्रेड किया जा रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर FCI की ताकत (1 फरवरी 2026 तक)
- कुल भंडारण क्षमता: 470.67 लाख टन।
- स्वयं की क्षमता: 147.20 लाख टन।
- किराए की क्षमता: 323.47 लाख टन।
- राज्य एजेंसियों के पास: 381.92 लाख टन।
विशेष: भंडारण संकट दूर करने के लिए सरकार के 5 बड़े कदम
- PEG योजना: निजी निवेश से 24 राज्यों में 148.61 लाख टन क्षमता के गोदाम तैयार।
- साइलो (Silos) निर्माण: आधुनिक भंडारण के लिए 57 स्थानों पर 32.25 लाख टन क्षमता के साइलो पूरे हो चुके हैं।
- खुले भंडारण का अंत: पंजाब-हरियाणा जैसे राज्यों में अनाज को सड़ने से बचाने के लिए 90 लाख टन नई क्षमता पर काम जारी।
- परिसंपत्ति मुद्रीकरण: पुराने बुनियादी ढांचे को बिना अतिरिक्त खर्च के आधुनिक बनाना।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (NFSA): छत्तीसगढ़ के लिए वर्ष 2025-26 (जनवरी तक) हेतु 1153.380 हजार टन चावल का आवंटन।
निष्कर्ष:
सांसद बृजमोहन अग्रवाल की इस सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मोदी सरकार की प्राथमिकता में किसान और गरीब जनता का राशन सबसे ऊपर है। भंडारण और वितरण प्रणाली को डिजिटल और आधुनिक बनाकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि खेत से निकला दाना सुरक्षित रूप से थाली तक पहुँचे।

