रायपुर। राजधानी रायपुर के सड्डू स्थित प्रयास आवासीय विद्यालय में जादू टोना के आरोप में 9वीं के बच्चे को टीसी देने का मामला सामने आया है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि छात्र का व्यवहार ठीक नहीं था। अंधेरे में बैठता था और कमरे में आकृतियां बनाता था।
हॉस्टल अधीक्षक ने दावा किया कि इस एक्टिविटी से हॉस्टल में रहने वाले कुछ बच्चे डर गए थे, जिसके बाद छात्र की काउंसलिंग कराई गई थी। टीसी दिए जाने के बाद बच्चे के माता-पिता ने मुख्यमंत्री शिकायत सेल में आवेदन दिया। इसके बाद बाल आयोग ने मामले में संज्ञान लिया और बच्चे की पढ़ाई जारी रखने के निर्देश दिए। साथ ही आयोग ने प्रयास विद्यालय के प्रिंसिपल और अधीक्षक से 3 दिन के अंदर जवाब मांगा है।

14 दिन में एडमिशन से टीसी तक पहुंचा मामला
परिवार वालों के मुताबिक, 3 सितंबर को सड्डू स्थित प्रयास आवासीय विद्यालय में बच्चे का एडमिशन कराया गया था। इसके करीब दो हफ्ते बाद उसे हॉस्टल से बाहर कर टीसी दे दी गई। आरोप है कि बच्चे पर तंत्र क्रिया से जुड़े आरोप लगाए गए और इसी आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई। माता पिता ने मुख्यमंत्री शिकायत सेल में शिकायत की है। उनका कहना है कि बच्चे के खिलाफ कार्रवाई से पहले उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं दी गई। परिवार ने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
स्कूल का पक्ष- दूसरे बच्चे डर रहे थे
वहीं, स्कूल प्रबंधन ने मामले को लेकर अपना पक्ष भी रखा है। हॉस्टल अधीक्षक आशीष पांडेय ने बताया कि छात्र के व्यवहार को लेकर उसकी काउंसलिंग कराई गई थी। संस्था का कहना है कि छात्र अक्सर अंधेरे में बैठता था और कमरे में आकृतियां बनाता था। इससे हॉस्टल में रहने वाले कुछ दूसरे बच्चे डर गए थे। स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, इस बारे में छात्र के परिजनों को बुलाकर जानकारी दी गई थी। प्रबंधन का कहना है कि छात्र को टीसी देने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया गया था। परिजनों ने खुद टीसी देने के लिए लिखित आवेदन दिया था।
बाल आयोग ने कहा- पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए
माता-पिता के आवेदन और सामने आए तथ्यों को देखने के बाद बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मामले का संज्ञान लिया है। अध्यक्ष ने छात्र की टीसी रद्द करने और उसकी पढ़ाई दोबारा शुरू कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने साफ कहा है कि मामले का अंतिम फैसला होने तक छात्र की पढ़ाई किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, रायपुर को मामले की पूरी जांच कर लिखित रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। आयोग अध्यक्ष ने अधिकारी से फोन पर बात कर जरूरी कार्रवाई करने को भी कहा है। बता दें कि यह कार्रवाई बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13(1)(ज) और धारा 14 के तहत यह कार्रवाई की है।
21 सितंबर को प्राचार्य-अधीक्षक को बुलाया
मामले की जांच के लिए प्रयास विद्यालय के प्रिंसिपल और अधीक्षक को 21 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे आयोग के ऑफिस में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। दोनों अधिकारियों को जरूरी दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखने को कहा गया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि छात्र पर लगाए गए आरोपों का आधार क्या था, उसे टीसी देने की प्रक्रिया कैसे अपनाई गई और इसकी जानकारी छात्र के परिजनों को कब और किस तरह दी गई। फिलहाल आयोग ने छात्र की पढ़ाई जारी रखने को प्राथमिकता दी है।

