भिलाई का कमाल: अब बीमारियों को पहचानेगा ‘स्मार्ट कोट’, रूंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों को मिला भारत सरकार से पेटेंट

भिलाई। स्वास्थ्य के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के नाम एक बड़ी उपलब्धि जुड़ी है। भिलाई स्थित रूंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी (आरसीईटी आर-१) के प्रोफेसरों ने एक ऐसा ‘स्मार्ट मेडिकल कोट’ तैयार किया है, जो पहनने वाले के दिल और फेफड़ों की रियल-टाइम निगरानी करेगा। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इस अत्याधुनिक तकनीक को मान्यता देते हुए पेटेंट जारी कर दिया है।

क्या है इस स्मार्ट कोट की खासियत?
यह कोट कोई साधारण कपड़ा नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता अस्पताल है। इसे यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर डॉ. सौरभ रूंगटा और डॉ. संदीप भट ने विकसित किया है।

बिना मशीन और सुई के जांच: यह कोट फेफड़ों में पानी, सांस की तकलीफ, ऑक्सीजन लेवल और ब्लड शुगर जैसी गंभीर बीमारियों को बिना किसी टेस्ट के पहचान सकता है।

सोलर एनर्जी से चलेगा: कोट में ‘सोलर फैब्रिक’ का इस्तेमाल किया गया है, जो पहनने के दौरान खुद ऊर्जा पैदा करता है और इसमें लगे सेंसर को एक्टिव रखता है।

मानसिक सेहत पर भी नजर: यह सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि तनाव, नींद की कमी और व्यवहारिक बदलावों को भी ट्रैक कर अलर्ट भेजता है।

मरीज के गंभीर होने से पहले मिलेगा ‘अलर्ट’
जैसे ही शरीर में कोई खतरनाक बदलाव होगा, यह कोट तुरंत मोबाइल ऐप और क्लाउड प्लेटफॉर्म के जरिए डॉक्टर और परिजनों को मैसेज भेज देगा। इससे इमरजेंसी की स्थिति में मरीज की जान समय रहते बचाई जा सकेगी।

इनके लिए होगा वरदान:

बुजुर्गों के लिए: जिन्हें घर पर लगातार मॉनिटरिंग की जरूरत होती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में: जहां बड़े अस्पताल दूर हैं, वहां इस कोट के जरिए डेटा डॉक्टर तक पहुंच सकेगा।

डिस्चार्ज के बाद: अस्पताल से घर लौटे मरीजों की रिकवरी ट्रैक करने में।

अगला कदम: क्लिनिकल ट्रायल

इस डिवाइस का अब बड़े अस्पतालों में मरीजों पर ट्रायल किया जाएगा। इसके लिए संस्थान जल्द ही केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से अनुमति लेने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है।

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