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अभिषेक मिश्रा हत्याकांड में किम्सी जैन बरी क्यों हो गई...सीनियर वकील के हवाले से पढ़िए फैसले की इनसाइड स्टोरी

अभिषेक मिश्रा हत्याकांड में किम्सी जैन बरी क्यों हो गई...सीनियर वकील के हवाले से पढ़िए फैसले की इनसाइड स्टोरी  

May 10, 2021

यशवंत साहू@भिलाई। छत्तीसगढ़ के हाइप्रोफाइल अभिषेक मिश्रा मर्डर केस में आज फैसला आ गया। दुर्ग डीजे ने इस मामले में विकास जैन और अजीत सिंह को दोषी पाया है। वहीं किम्सी जैन को दोषमुक्त करते हुए इस पूरे केस से ही बरी कर दिया है। अब लोगों के मन में ये सवाल कॉमन है कि किम्सी जैन कैसे बरी हो गई?

2015 में जब मामला एक्सपोज हुआ था, तब पुलिस की थ्योरी में तो किम्सी जैन भी आरोपी थी। इस मर्डर केस में उसका भी नाम था। तो कोर्ट में किम्सी बरी कैसे हो गई? ये सवाल आज दिनभर छत्तीसगढ़ के उन लोग करते रहे जो इस केस को किसी न किसी तरह जानते हैं और समझते हैं।

भिलाई TIMES ने इस मामले में आरोपी पक्ष के सीनियर वकील बीपी सिंह से बातचीत की। बीपी सिंह हाईकोर्ट के जाने-माने वकील हैं। जब मामले में फैसला आया तब वे बिलासपुर में ही थे। ऑनलाइन वे इस केस से जुड़े और फैसले को सुना। बीपी सिंह ने कहा, इस केस में पुलिस ने किम्सी जैन को भी आरोपी बनाया था। लेकिन अभियोजन पक्ष ये साबित नहीं कर सका कि किम्सी जैन इस मामले में आरोपी है। अगर आरोपी भी है तो क्यों है? और क्यों आरोपी मानना चाहिए‌? ऐसे कोई सबूत पेश नहीं कर सके। इसका फायदा किम्सी को मिला और कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।

बीपी सिंह ने आगे यह भी कहा कि, किम्सी जैन पर जो आरोप लगे थे वो साबित नहीं हो सके। पुलिस इस मामले में गवाह पेश नहीं कर सकी। ऐसी कोई कड़ी ही नहीं जुड़ी जो किम्सी काे सजा दिलाने के लिए काफी रहे। जबकि विकास जैन और अजीत सिंह के खिलाफ कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने सबूत पेश किए। उसकी कड़ियां अभियोजन पक्ष ने जोड़ी जिसकी वजह से विकास जैन और अजीत सिंह को उम्रकैद की सजा हुई है।

इस मामले में अभियोजन पक्ष के सीनियर वकील राजकुमार तिवारी ने बताया कि हत्याकांड में शामिल किम्सी जैन को बरी कर दिया गया है। जज ने किम्सी को लेकर कहा कि परिस्थितिजन्य प्रकरण है और किम्सी के खिलाफ परिस्थितियां प्रमाणित नहीं हुई हैं। आरोपी विकास जैन और अजीत सिंह को जीवन की अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनायी गई है।

रिकॉल: नवंबर 2015 की वारदात, दफनाने के बाद गोभी के पौधे लगा दिए थे
नवंबर 2015 में अभिषेक मिश्रा की हत्या कर दी गई थी। 10 नवंबर 2015 की शाम शंकराचार्य इंजीनियरिंग कालेज के चेयरमैन IP मिश्रा के इकलौते बेटे अभिषेक मिश्रा का अपहरण हुआ था। किडनैपिंग की खबर ने तब पूरे प्रदेश में खलबली मचा दी थी। पुलिस ने भी इसे सुलझाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। यही वजह थी कि पूरे देश के लाखों मोबाइल फोन की डिटेल खंगालने के बाद पुलिस की निगाह भिलाई में रहने वाले सेक्टर-10 निवासी विकास जैन के ऊपर टिक गई थी।

एक तरफ पुलिस कॉल डिटेल को आधार बनाकर जांच शुरू कर चुकी थी, वहीं दूसरी ओर किडनैपिग की घटना के करीब 45 दिन बाद किम्सी के चाचा अजीत सिंह के स्मृति नगर निवास के बगीचे में अभिषेक की सड़ी-गली लाश बरामद हुई। किम्सी के पति विकास ने अपने चाचा ससुर अजीत सिंह के साथ मिलकर बेहद ही शातिराना अंदाज में लाश को दफना कर ऊपर फूल गोभी की सब्जियां उगा दी थी। पुलिस ने लाश के पास हाथ का कड़ा, अंगूठी और लाॅकेट देखकर अभिषेक की लाश होने की पुष्टि की थी। लाश का DNA टेस्ट भी कराया गया था।

कॉलेज में जॉब करती थी किम्सी
मामले में अभिषेक के काॅलेज में पूर्व में जॉब करने वाले किम्सी जैन, उसके चाचा अजीत और पति विकास जैन को गिरफ्तार किया गया था। तीनों की गिरफ्तारी के बाद लगातार इस मामले की जांच की गई और जांच पूरी होने के बाद दुर्ग न्यायालय में चार्जशीट पेश की गई। करीब साढ़े 5 साल (2016) से ये मामला दुर्ग जिला न्यायालय में चल रहा था।

पुलिस की जांच थ्योरी में आया था कि आरोपी किम्सी जैन, अभिषेक मिश्रा के कालेज में काम करती थी। इसी दौरान दोनों करीब आए थे। साल 2013 में किम्सी ने विकास जैन से शादी कर ली और कालेज की नौकरी छोड़ दी। लेकिन अभिषेक चाहता था कि उनका रिश्ता कायम रहे।

वह लगातार किम्सी पर इसके लिए दबाव डाल रहा था। परेशान किम्सी ने पूरी बात अपने पति विकास को बताई। पति के मन में बदला लेने की भावना आ गई।



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