बिलासपुर। पति-पत्नी के विवाद से जुड़े एक अहम फैसले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा है कि पति का पत्नी और उसकी बहनों को फोन पर अभद्र गालियां देना और लगातार परेशान करना गंभीर मानसिक क्रूरता है। जस्टिस प्रार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की बेंच ने फैमिली कोर्ट के आदेश को पलटते हुए पत्नी को तलाक की राहत दी है।
दरअसल उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रहने वाली महिला की शादी 5 दिसंबर 2021 को बिहार के भोजपुर निवासी आनंद कुमार गुप्ता से हुई थी। आरोप है कि शादी के कुछ दिन बाद ही पति मारपीट, अभद्र व्यवहार और दहेज में AC की मांग करने लगा। प्रताड़ना से तंग आकर पत्नी अंबिकापुर स्थित अपने मायके आ गई और फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई। फैमिली कोर्ट ने 2 अप्रैल 2024 को अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में अपील की थी। सुनवाई के दौरान पति कोर्ट में पेश नहीं हुआ।

हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट अधिनियम की धारा 14 के तहत तकनीकी खामी के बावजूद वॉट्सऐप चैट को सबूत के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है। पति ने चैट और आरोपों का खंडन नहीं किया। चैट में पत्नी और उसकी बहनों के प्रति अपमानजनक रवैया सामने आया, जिससे मानसिक वेदना हुई।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि एक कामकाजी महिला या किसी भी पत्नी को इस तरह की मानसिक और शारीरिक यातना देना सहन नहीं किया जा सकता।
साथ ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि पत्नी ने मुकदमे के दौरान स्थायी गुजारा भत्ते के लिए आवेदन नहीं दिया था, इसलिए उसे हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 25 के तहत अलग से आवेदन कर भत्ता मांगने की छूट है।