रायपुर। झारखंड के एक छोटे से गांव से निकलकर वेटलिफ्टर बाबूलाल हेम्ब्रम अपनी मेहनत और लगन से नई पहचान बना रहे हैं। रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में बाबूलाल ने पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक (Silver Medal) जीता है। उनकी यह सफलता इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने अभावों के बीच बांस की लकड़ियों और लोहे की रॉड से इस खेल की शुरुआत की थी।

बांस और लोहे की रॉड से शुरू हुआ सफर
झारखंड के रामगढ़ जिले के केरिबांदा गांव के रहने वाले बाबूलाल की आर्थिक स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी। ट्रेनिंग के लिए उपकरण खरीदने के पैसे नहीं होने के कारण उन्होंने निर्माण स्थलों पर बांस की लकड़ियों और लोहे की रॉड से अभ्यास शुरू किया। बाद में कोच गुरविंदर सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली, जिसके लिए वे रोज 60 किलोमीटर का सफर तय करते थे।
शानदार उपलब्धियां:
- 2024: खेलो इंडिया यूथ गेम्स (49 किग्रा वर्ग) में स्वर्ण पदक जीता।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर: एशियाई और विश्व युवा चैंपियनशिप में भी पदक हासिल किए।
- 2026: खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (रायपुर) में रजत पदक अपने नाम किया।
मां स्कूल में रसोइया, बेटा देश का मान
19 वर्षीय बाबूलाल पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनकी मां एक स्थानीय स्कूल में रसोइया हैं और पिता छोटे-मोटे काम करते हैं। बाबूलाल ने बताया कि आर्थिक तंगी के बावजूद उन्हें भरोसा था कि खेल उन्हें एक दिन बेहतर मुकाम दिलाएगा। फिलहाल वे पटियाला के राष्ट्रीय शिविर (National Camp) में ट्रेनिंग ले रहे हैं।
लक्ष्य: कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स
सीनियर सर्किट में कदम रख चुके बाबूलाल का सपना अब कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है। उनका कहना है कि यह रजत पदक उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला है और वे जल्द ही बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में नजर आएंगे।