दंतेवाड़ा। जिले का आदिवासी विकास विभाग एक बार फिर विवादों में घिर गया है। विभाग में साल 2021 से 2025 के बीच जिला खनिज निधि (DMF) मद से कराए गए कार्यों में भारी अनियमितताओं की परतें खुलने लगी हैं। कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच कमेटी ने निविदा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी और कूट रचित दस्तावेजों के इस्तेमाल का खुलासा किया है। इसके बाद अब विभाग के दो पूर्व सहायक आयुक्त और एक क्लर्क पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

मामले में विभाग के वर्तमान सहायक आयुक्त राजीव नाग ने कलेक्टर के निर्देश पर सिटी कोतवाली में आवेदन पेश किया है। आवेदन के आधार पर जल्द ही आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में निविदाओं की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से न होकर मनमानी और धांधली के जरिए पूरी की गई थी।
जांच में सामने आया है कि उस समय सहायक आयुक्त के पद पर डॉ. आनंदजी सिंह और केएस मसराम पदस्थ थे। इनके कार्यकाल में निविदा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं। वहीं, विभाग के क्लर्क संजय कोडोपी द्वारा कूट रचित दस्तावेज तैयार कर निविदाओं की प्रक्रिया को निपटाया जाता रहा। प्राथमिक जांच में दोषी पाए जाने पर संजय कोडोपी को फिलहाल निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है।
तीनों अधिकारियों पर कार्रवाई तय
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अब इन तीनों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की पूरी तैयारी है। आवेदन सिटी कोतवाली पुलिस को सौंप दिया गया है और आने वाले दिनों में इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली जाएगी।