महिला आरक्षण के नाम पर भाजपा कर रही राजनीति, देश को गुमराह करने का आरोप: मुकेश साहू

रायपुर | महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री मुकेश साहू ने केंद्र की भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा महिला सशक्तिकरण के नाम पर केवल राजनीति कर रही है और देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।

“सशक्तिकरण नहीं, परिसीमन है असली एजेंडा”

मुकेश साहू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि भाजपा द्वारा लाया गया विधेयक महिलाओं को अधिकार देने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि परिसीमन (Delimitation) लागू करने के छिपे हुए एजेंडे के तहत लाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इसके माध्यम से देश की लोकतांत्रिक संरचना को प्रभावित कर भविष्य में राजनीतिक लाभ लेने की योजना बना रही है।

क्रियान्वयन में देरी की रणनीति

कांग्रेस महामंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से महिला आरक्षण की समर्थक रही है। उन्होंने महत्वपूर्ण बिंदु उठाए:

  • अनावश्यक देरी: वर्ष 2023 में पारित कानून के बाद 33% आरक्षण का मार्ग प्रशस्त हो गया था, लेकिन केंद्र ने इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़कर जानबूझकर लटका दिया है।
  • सीटों का गणित: साहू ने तर्क दिया कि वर्तमान की 543 लोकसभा सीटों पर भी महिला आरक्षण को आसानी से लागू किया जा सकता है, लेकिन सरकार सीटों की संख्या बढ़ाने और अपनी सुविधानुसार परिसीमन करने की जुगत में है।

“संसद में विधेयक का गिरना भाजपा की गंभीरता पर सवाल”

मुकेश साहू ने हालिया संसदीय घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि संबंधित विधेयक का आवश्यक बहुमत प्राप्त न कर पाना यह साबित करता है कि भाजपा स्वयं इसे पारित कराने के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने इसे केवल एक ‘राजनीतिक दिखावा’ करार दिया।

“सत्ताधारी दल द्वारा महिला अधिकारों के नाम पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। महिला आरक्षण को बिना किसी शर्त और परिसीमन के तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए ताकि महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व मिल सके।” — मुकेश साहू, महामंत्री, शहर जिला कांग्रेस कमेटी

कांग्रेस का रुख: बिना शर्त लागू हो आरक्षण

मुकेश साहू ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है। उन्होंने जनता को भाजपा द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम से सतर्क रहने की अपील की और मांग की कि महिलाओं के हक को किसी जटिल प्रक्रिया में उलझाने के बजाय सीधे तौर पर लागू किया जाए।

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