सुशासन तिहार में बवाल, विधायक चंद्राकर के सामने CEO बोले….मेरा क्या कर लोगे…

दुर्ग। छत्तीसगढ़ सरकार इन दिनों सुशासन तिहार के जरिए जनता की समस्याओं के समाधान का दावा कर रही है, लेकिन दुर्ग जिले के थनौद गांव में आयोजित शिविर में जो नजारा देखने को मिला, उसने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर यहां सुशासन हुआ या ‘विवाद तिहार‘ मनाया जा रहा था। शिविर में समस्याओं की सुनवाई के दौरान स्थिति ऐसी बनी कि बीजेपी कार्यकर्ता औैर जनपद सीईओं ही आपस में भिड़ गये।

विवाद इनता बढ़ा कि जनपद सीईओ अपना आपा खो बैठे और विधायक के सामने ही बीजेपी कार्यकर्ताओं कोे उंगली दिखाते हुए कह दिया…..तेरे को जो करना है कर ले ! अब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। जानकारी के मुताबिक ये पूरा घटनाक्रम दुर्ग जिले के ग्राम थनौद का है। जहां जिला प्रशासन द्वारा सुशासन शिविर का आयोजन किया गया था।

सुशासन शिविर में मामला उस वक्त गरमा गया, जब अपनी शिकायत लेकर पहुंचे भाजपा कार्यकर्ताओं की जनपद पंचायत के सीईओ से बहस हो गई। शिकायत के निराकरण को लेकर शुरू हुई बातचीत देखते ही देखते ऐसी दिशा में पहुंच गई, जहां समाधान की जगह शब्दों के तीर चलने लगे।

वायरल वीडियो में सीईओ साहब पूरे आत्मविश्वास के साथ भाजपा कार्यकर्ता को उंगली दिखाते हुए कहते नजर आ रहे हैं….‘तेरे को जो करना है कर ले।‘ दिलचस्प बात यह रही कि यह पूरा घटनाक्रम दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर की मौजूदगी में हुआ। सुशासन शिविर में जनता के साथ ही अधिकारी, भाजपा नेता और विधायक भी थे। लेकिन विवाद बढ़ता रहा और समाधान कहीं दिखाई नहीं दिया।

वीडियो में विधायक शांत मुद्रा में खड़े नजर आ रहे हैं। मसलन उन्होने इस विवाद को शांत कराने का भी प्रयास नहीं किया। सोशल मीडिया में वीडियो वायरल होने के बाद लोग तरह-तरह की बातें कर रहे है। गौरतलब है कि सुशासन तिहार का उद्देश्य जनता की शिकायतों का त्वरित निराकरण करना है। लेकिन थनौद के इस शिविर में शिकायत का समाधान तो दूर, शिकायतकर्ता बीजेपी के कार्यकर्ता और अधिकारी आमने-सामने खड़े दिखाई दिए। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं को ही अधिकारियों से इस अंदाज में जवाब मिल रहा है, तो आम जनता की सुनवाई किस अंदाज में होती होगी ?

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