बसोहली उत्सव 2026 में छत्तीसगढ़ के कार्टूनिस्ट सागर कुमार दिखाएंगे हुनर, राष्ट्रीय मंच पर चलेगी कूची

रायपुर। छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है कि प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कार्टूनिस्ट सागर कुमार जम्मू-कश्मीर में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के ‘बसोहली उत्सव 2026’ में अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। 19 से 21 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय महोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों से प्रमुख कार्टूनिस्ट और कलाकार शामिल होंगे। खास बात यह है कि जम्मू-कश्मीर सरकार के इस आयोजन में आमंत्रित किए गए सागर कुमार छत्तीसगढ़ के इकलौते कार्टूनिस्ट हैं।

देशभर के दिग्गज कार्टूनिस्ट होंगे शामिल

बसोहली उत्सव के विशेष कार्टून सेगमेंट में जम्मू-कश्मीर के बाहर से चार प्रमुख कार्टूनिस्ट हिस्सा लेंगे। इनमें छत्तीसगढ़ के सागर कुमार के साथ देशभर में विख्यात कार्टूनिस्ट मनोज कुरील और प्रमुख कार्टूनिस्ट माधव जोशी शामिल हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर से मनोज चोपड़ा, चंद्र शेखर और कश्मीर के शाह तारिक भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।

महोत्सव के चौथे सीजन में सभी कलाकार लाइव कार्टून मेकिंग सत्र, कार्यशालाओं और विशेष प्रदर्शनी के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय देंगे। इससे खासतौर पर बच्चों और युवा कलाकारों को अनुभवी कार्टूनिस्टों को करीब से काम करते देखने और कार्टून बनाने की बारीकियां सीखने का अवसर मिलेगा।

सामाजिक मुद्दों पर कार्टूनों से दिया जाएगा संदेश

बसोहली उत्सव में कार्टून कला के माध्यम से सामाजिक जागरूकता फैलाने पर भी विशेष जोर रहेगा। इसके तहत ‘विकास भी, विरासत भी’, ‘स्वच्छ भारत’ और ‘नशे को ना कहें’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित कार्टूनों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी।

हास्य, व्यंग्य और दृश्य कहानी कहने की कला के जरिए कलाकार इन विषयों को आम लोगों तक सरल और प्रभावशाली तरीके से पहुंचाएंगे। इस पहल का उद्देश्य कला को केवल मनोरंजन तक सीमित न रखते हुए सामाजिक बदलाव और जनजागरूकता का माध्यम बनाना है।

खुले सार्वजनिक स्थल पर सजेगी आउटडोर कार्टून प्रदर्शनी

महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण आउटडोर कार्टून प्रदर्शनी होगी। इसमें कार्टूनों को पारंपरिक आर्ट गैलरी के बजाय खुले सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित किया जाएगा। इससे स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को बसोहली की सांस्कृतिक विरासत के बीच कार्टून कला को देखने और समझने का अवसर मिलेगा।

विभिन्न राज्यों के कलाकारों की भागीदारी से यह आयोजन कला, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों के बीच संवाद का साझा मंच बनेगा। साथ ही, युवा प्रतिभाओं को देश के प्रतिष्ठित कार्टूनिस्टों से सीखने और अपनी रचनात्मकता को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा।

क्या है बसोहली उत्सव का इतिहास?

बसोहली उत्सव की शुरुआत जम्मू-कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और 17वीं सदी की विश्व प्रसिद्ध बसोहली चित्रकला को संरक्षित करने तथा प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हुई थी। इस महोत्सव के जरिए स्थानीय कला, डोगरा संस्कृति, हस्तशिल्प और पर्यटन को व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास किया जाता है।

सदियों पुरानी पहाड़ी चित्रकला की परंपरा और आधुनिक रचनात्मकता का संगम बना यह उत्सव अब कलाकारों और कला प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन रहा है। वर्ष 2026 के आयोजन में कार्टून कला को विशेष स्थान मिलने से इसकी रचनात्मक विविधता और बढ़ेगी। छत्तीसगढ़ के सागर कुमार की भागीदारी से प्रदेश की कला प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

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