छत्तीसगढ़ में SIR को लेकर सियासी घमासान, पूर्व मंत्री अकबर ने किया 24.99 लाख मतदाताओं की कमी का दावा, उठाए सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने SIR के बाद मतदाता सूची में करीब 24.99 लाख मतदाताओं की कमी होने का दावा करते हुए निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच जितना वोट अंतर रहा था, उसके मुकाबले यह संख्या करीब चार गुना है।

हालांकि, मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की उपलब्ध रिपोर्ट के आंकड़ों में ‘Shifted/Absent’ श्रेणी में 19,13,540 मतदाता दर्ज किए गए हैं। निर्वाचन विभाग के अनुसार इस श्रेणी में ऐसे मतदाता शामिल थे, जिन्हें BLO दिए गए पते पर नहीं मिले, जिन्होंने गणना फॉर्म जमा नहीं किया या जो किसी अन्य राज्य अथवा केंद्रशासित प्रदेश में मतदाता के रूप में दर्ज हो चुके थे।

SIR के Enumeration Phase में क्या सामने आया?

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की 23 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार SIR के Enumeration Phase में कुल 1,84,95,920 मतदाताओं के Enumeration Forms प्राप्त हुए। इसी प्रक्रिया के दौरान:

6,42,234 मतदाताओं को मृत श्रेणी में दर्ज किया गया।

19,13,540 मतदाता ‘Shifted/Absent’ श्रेणी में रखे गए।

1,79,043 मतदाता एक से अधिक स्थानों की मतदाता सूची में पाए गए।

निर्वाचन विभाग के मुताबिक, ‘Shifted/Absent’ श्रेणी में रखे गए मतदाताओं में वे लोग शामिल हैं जिन्हें BLO संबंधित पते पर नहीं खोज पाए, जिन्होंने गणना फॉर्म वापस नहीं किया या जो किसी दूसरे राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में मतदाता के तौर पर दर्ज पाए गए।

मोहम्मद अकबर ने उठाए सवाल

पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने SIR के बाद मतदाता सूची में आई कमी को लेकर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि करीब 24.99 लाख नाम कम हुए हैं। उन्होंने इस संख्या की तुलना 2023 विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच रहे वोट अंतर से की है।

अकबर का आरोप है कि ‘Shifted/Absent’ श्रेणी में रखे गए मतदाताओं को पर्याप्त नोटिस और अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने निर्वाचन आयोग से ऐसे मतदाताओं की व्यक्तिगत स्तर पर समीक्षा कराने की मांग की है।

पात्र मतदाताओं को दोबारा जुड़ने का मौका

निर्वाचन विभाग की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार SIR प्रक्रिया में वास्तविक पात्र मतदाताओं के लिए दावे और आपत्तियां दाखिल करने का प्रावधान रखा गया था। ऐसे में किसी पात्र मतदाता का नाम प्रक्रिया के दौरान सूची से बाहर हुआ है, तो निर्धारित दावे-आपत्ति प्रक्रिया के जरिए उसे दोबारा शामिल किए जाने का रास्ता उपलब्ध है।

अब SIR की अंतिम प्रक्रिया और दावे-आपत्तियों के निपटारे के बाद मतदाता सूची में कितने नाम जुड़ते हैं और कितने नाम बाहर रहते हैं, यह अहम होगा। इसी के आधार पर मतदाता सूची में वास्तविक बदलाव की तस्वीर साफ होगी।

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