छत्तीसगढ़ में युक्त युक्तिकरण के विरोध में 28 मई को मंत्रालय घेराव… 23 शैक्षिक संगठनों ने मिलकर सरकार को दिया आंदोलन का अल्टीमेटम; जानिए और क्या कहा?

रायपुर। विसंगतिपूर्ण युक्त युक्तिकरण का पुरजोर विरोध एवं सोना साहू के तर्ज पर प्रदेश के एक लाख से अधिक शिक्षकों को एरियर्स सहित क्रमोन्नति वेतनमान देने, प्रथम सेवा गणना करते हुए पुरानी पेंशन बहाली सहित समस्त लाभ एवं प्रशिक्षितों को प्रमोशन के लिए बीएड की अनिवार्यता में छूट देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर सर्व शैक्षिक संगठन के बैनर तले प्रदेश के 23 शिक्षक संगठनों ने मिलकर आज सभी संगठनों के प्रांत अध्यक्षों के नेतृत्व में ज्ञापन दिया गया मंत्रालय एवं संचनालय में राज्य सरकार व विभाग के उच्चाधिकारियों को ज्ञापन एवं अल्टीमेटम दिया।

सभी 23 संगठनों के प्रांत अध्यक्षों मनीष मिश्रा, केदार जैन, संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे, विकास राजपूत, कृष्णकुमार नवरंग, राजनारायण द्विवेदी, जाकेश साहू, भूपेंद्र बनाफर, शंकर साहू, विष्णु प्रसाद साहू, भूपेंद्र गिलहरे, चेतन बघेल, गिरीश केशकर, लैलूंन भरतद्वाज, प्रदीप पांडे, प्रदीप लहरें, राजकिशोर तिवारी, कमल दास मुरचले, प्रीतम कोशले, विक्रम राय, अनिल टोप्पो एवं धरमदास बंजारे आदि ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि राज्य सरकार की विसंगतिपूर्ण युक्त युक्तिकरण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्राथमिक शाला में दो शिक्षक कैसे पढ़ाएंगे..??? 2008 के सेटअप से छेड़छाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं करेंगे। केंद्र सरकार के शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत 2009 में यह शिक्षा विभाग का सेटअप लागू किया गया था। जिसमें प्राथमिक शाला में न्यूनतम 60 दर्ज पर कम से कम तीन शिक्षक अर्थात एक अनुपात दो। इसी प्रकार मिडिल स्कूलों में पांच शिक्षक अर्थात एक अनुपात चार।

प्रांताध्यक्षगण केदार जैन, मनीष मिश्रा, संजय शर्मा, वीरेन्द्र दुबे, विकास राजपूत, कृष्णकुमार नवरंग एवं राजनारायण द्विवेदी ने कहा कि हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलो में विषय आधारित शिक्षकों के अलावा दर्ज संख्या के आधार पर शिक्षकों की वृद्धि 2008 के सेटअप अनुसार होनी चाहिए। सभी प्रांताध्यक्षों ने कहा है कि यदि प्रदेश में शिक्षकों के पद रिक्त हैं तो रिक्त पदों पर सरकार को शिक्षकों की भर्ती करनी चाहिए। लेकिन सेटअप में छेड़छाड़ कर स्कूलों से शिक्षकों की संख्या घटाना यह किसी भी सूरत में उचित नहीं है।

सभी शिक्षक संगठनों ने एक स्वर में जोर देकर कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर विसंगतिपूर्ण युक्त युक्तिकरण पर सरकार यदि रोक नहीं लगाती है एवं सभी शिक्षक संगठनों की बैठक कर उनके द्वारा सुझाव लेकर अमल नहीं किया जाता है तो आगामी 28 मई को प्रदेश भर के सारे शिक्षको द्वारा सर्व शैक्षिक संगठन अर्थात 23 शिक्षक संगठनों के साझा मंच के बैनर तले राजधानी रायपुर में उपस्थित होकर मंत्रालय महानदी भवन में अनिश्चितकालीन घेराव एवं धरना प्रदर्शन करेंगे। इस पर यदि कानून व्यवस्था बिगड़ती है तो जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

सभी शिक्षक नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग द्वारा तरह-तरह का प्रयोग किया जा रहा है। पहले बना बनाया 2008 का सेटअप को पिछले वर्ष भी रद्द किया जा रहा था। जिसका पुरजोर विरोध करने पर इसको बंद किया गया था। लेकिन इस बार जब यह प्रक्रिया फिर से अपनाई गई तो किसी भी शिक्षक संगठन को नहीं बुलाया गया।

जबकि पिछले बार यह बात हुई थी कि नया सेटअप लागू करने से पहले सभी शिक्षक संगठनों की बैठक बुलाकर सभी से सुझाव मांगे जाएंगे एवं सभी के सहमति के आधार पर ही यह लागू किया जाएगा तो इस बार सबको बिना बुलाए एवं किसी संगठन के बगैर सहमति के यह सेटअप में बदलाव किया जा रहा जो किसी भी कीमत पर बर्दास्त नहीं।

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