छत्तीसगढ़ के इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला चाहते हैं बाहरी राज्यों के छात्र...कॉलेज संचालकों ने भूपेश सरकार से की दोबारा काउंसिलिंग की मांग, सरकार की इस पहल से फिर लौट सकता है इंजीनियरिंग का पुराना दौर

छत्तीसगढ़ के इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला चाहते हैं बाहरी राज्यों के छात्र...कॉलेज संचालकों ने भूपेश सरकार से की दोबारा काउंसिलिंग की मांग, सरकार की इस पहल से फिर लौट सकता है इंजीनियरिंग का पुराना दौर  

December 12, 2020

भिलाई। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों ने तकनीकी शिक्षा निदेशालय को पत्र लिखकर संस्थावार काउंसलिंग को 31 दिसंबर तक आगे बढ़ाने की गुजारिश की है। दरअसल, हाल ही में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने तकनीकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश देने के लिए राज्यों को 31 दिसंबर तक की मोहलत दे दी है, लेकिन प्रदेश डीटीई की काउंसलिंग 5  दिसंबर को समाप्त हो गई। डीटीई को भी एआईसीटीई का ये पत्र मिला है, लेकिन काउंसलिंग फिर से शुरू कराने डीटीई ने फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया है। यही वजह रही कि कॉलेजों ने अपने स्तर पर डीटीई से चर्चा शुरू कर दोबारा से संस्थावार काउंसलिंग की मांग रखी है।

कॉलेजों ने दिया यह तर्क
इंजीनियरिंग कॉलेजों का कहना है कि प्रदेश में 5 हजार के करीब एडमिशन हुए हैं, जबकि 7 हजार सीटें अभी भी रिक्त है। ऐसे में यदि डीटीई संस्थावार काउंसलिंग को दोबारा शुरू करता है तो यकीनन एडमिशन के ग्राफ में बढ़ोतरी होगी।  जेईई कोटे की काउंसलिंग हाल ही में खत्म हुई है, फिर भी बहुत से स्टूडेंट्स हैं, जो उस वक्त एडमिशन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए। इसमें कोरोना संक्रमण का खतरा बड़ी वजह रही।  अब यह स्टूडेंट्स कॉलेजों में एडमिशन लेने की इच्छा जाहिर कर रहे हैं, लेकिन काउंसलिंग समाप्त हो चुकी है। कॉलेजों ने बताया कि बाहरी राज्यों के स्टूडेंट्स छत्तीसगढ़ में एडमिशन लेने के लिए राजी हैं।

देरी से आए पूरक के नतीजे
संस्थावार काउंसलिंग को दोबारा से शुरू कराने के पीछे १२वीं  कक्षा में पूरक के नतीजे देरी से आना भी वजह है। कॉलेजों ने कहा कि विभिन्न राज्यों के बोर्ड में पूरक के नतीजे आने में देर हुई। जब नतीजे आए उस वक्त संस्थावार काउंसलिंग का आखिरी चरण चल रहा था। सीजी बोर्ड और सीबीएसई बोर्ड के नतीजों में भी इस साल कोरोना संक्रमण की वजह से देर हुई है। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के आखिरी सेमेस्टर के नतीजे जारी करने में देर हुई, जिससे पीजी में प्रवेश लेने वाले छात्र बिखर गए।



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