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जिस जेल में बंद है सुधा भारद्वाज, वहां कोरोना विस्फोट...इंद्राणी मुखर्जी समेत 38 संक्रमित, भिलाई के कार्यकर्ताओं ने की सुधा को जेल से रिहा करने की मांग

जिस जेल में बंद है सुधा भारद्वाज, वहां कोरोना विस्फोट...इंद्राणी मुखर्जी समेत 38 संक्रमित, भिलाई के कार्यकर्ताओं ने की सुधा को जेल से रिहा करने की मांग  

April 26, 2021

यशवंत साहू@ भिलाई। मुंबई के भायखला जेल में कोरोना विस्फोट हुआ है। 38 कैदी कोरोना की चपेट में आ गए हैं। इसमें इंद्राणी मुखर्जी भी शामिल हैं। इसी जेल में भीमा कोरेगांव मामले में सुधा भारद्वाज भी हैं। 2018 से जेल में बंद है। भिलाई के कार्यकर्ता उनकी रिहाई की दरख्वास्त कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिति के कलादास डाहरिया ने बताया कि, मजदूर नेत्री एवं अधिवक्ता सुधा भारद्वाज के ऊपर लगाए गए आरोप निराधार है। वह निर्दोष है फिर भी उन्हें जेल में रखा गया है।



अमेरिकी साइबर फोरेंसिक फर्म, आर्सेनल कंसल्टिंग ने एक दूसरी रिपोर्ट जारी की है। जिसमें बाहरी मैलवेयर के उपयोग के माध्यम से रोना विल्सन (मामले में सह-अभियुक्त) कंप्यूटर में "बरामद दस्तावेजों" के रोपण की पुष्टि की गई है। गंभीर बात है कि सुधा भारद्वाज के खिलाफ अभियोजन पक्ष द्वारा भरोसा किए गए भ्रामक दस्तावेजों में से एक रोना विल्सन के कंप्यूटर पर पाया गया था।



कलादास ने बताया कि आर्सेनल कंसल्टिंग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि यह दस्तावेज बाहर से स्थापित किया गया था। यह रिपोर्ट इस बात की पुनः पुष्टि करती है जो सुधा भारद्वाज के परिवार और दोस्त 28 अगस्त 2018 को सुधा भारद्वाज के घर में पहली बार छापा डाले जाने के बाद से लगातार और स्वतंत्र रूप से कह रहे हैं कि वह निर्दोष है और गढ़े हुए सबूतों के आधार पर लगभग तीन वर्षों से उसे कैद में रखा गया है।

 


कलादास ने बताया कि इस साल फरवरी में अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट में मैसाचुसेट्स स्थित कंसल्टिंग फर्म ने भीमा कोरेगांव के एक आरोपी रोना विल्सन के लैपटॉप में परिष्कृत हैकर द्वारा 10 अक्षरों के "डिपॉजिट" की पुष्टि की थी। 27 मार्च की दूसरी रिपोर्ट में रोना विल्सन के कंप्यूटर में बहुत तरीके से नेटवायर मैलवेयर का उपयोग करके उसी अज्ञात हैकर द्वारा बाहर से 22 दस्तावेजों के "रखे" की पुष्टि की है।



छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्च मजदूर कार्यकर्ता समिति के बंशी साहू, लखन साहू, नीरा ने बताया कि आर्सेनल रिपोर्ट की जांच करने वाली एक विस्तृत खबर को "द वाशिंगटन पोस्ट" ने अमेरिका में और "आर्टिकल 14" भारत में छापा गया। रोना विल्सन के उपकरण की जांच करते समय, आर्सेनल कंसल्टिंग ने न केवल अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि विल्सन का कंप्यूटर "22 महीनों से अधिक के लिए कम्प्रोमाइसड" था, लेकिन भीम कोरेगांव मामले से जुड़े कई अन्य लोगों के उपकरणों के साथ छेड़छाड़ में एक ही हमलावर चार साल की निरंतर अवधि के लिए जिम्मेदार था।



इसमें कनाडाई समूह, सिटीजन लैब और एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा की गई 2019 और 2020 की जांच का संदर्भ है, जिसमें पाया गया था कि इस मामले में अभियुक्तों के वकीलों और सहयोगियों के कई उपकरण दुर्भावनापूर्ण मैलवेयर पेगासस के लक्ष्य थे, और नेटवेयर मालवेयर ले जाने वाले ईमेल भी।



कार्यकर्ता बंशी साहू, लखन साहू, नीरा, सरस्वती, कल्याण पटेल, रमाकांत बंजारे, महेश साहू, बिष्णु यादव, राजकुमार साहू, मनोज कोशरे, जय प्रकाश नायर, पुष्पा, भवदीय रचना, श्रेया, खेमिन, नकुल साहू, कलादास डेहरिया समेत अन्य ने कहा, ऐसा दावा बेहद गंभीर है और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा करीबी परीक्षा / जांच की मांग करता है, जो फिलहाल मामले की जांच कर रहा है। एक जांच एजेंसी के रूप में, एनआईए को आर्सेनल कंसल्टिंग द्वारा इस रिपोर्ट का स्वागत करना चाहिए था। और इसमें किए गए दावों को स्थापित करने या अस्वीकार करने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

इस रिपोर्ट की आगे जांच करने से इनकार करना बहुत परेशान करने वाला और नागरिकता के लिए भयावह है, क्योंकि यह राज्य के इरादे पर गंभीर सवाल उठाता है। जबकि रिपोर्ट में परिष्कृत साइबर हमलों से संबंधित इतने व्यापक और परेशान करने वाले ऑपरेशन की जानबूझकर अनदेखी का दावा तक शामिल हैं।



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