मोहला। शिक्षा विभाग की जमीनी हकीकत की पड़ताल के लिए शिक्षामंत्री गजेंद्र यादव के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के दो दिवसीय प्रवास के बीच सरकारी स्कूलों में बिजली बिल के भुगतान को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिले के 599 से अधिक प्राथमिक, माध्यमिक, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों का करीब 41 लाख रुपये बिजली बिल बकाया है। भुगतान नहीं होने के कारण विद्युत विभाग ने कई स्कूलों की बिजली आपूर्ति काट दी है।
महीनों से बकाया है बिजली बिल
विद्युत मंडल के अधिकारियों के अनुसार शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सैकड़ों सरकारी शिक्षण संस्थानों का बिजली बिल पिछले कई महीनों से लंबित है। बकाया राशि का भुगतान नहीं होने पर स्मार्ट मीटर के माध्यम से संबंधित स्कूलों की बिजली आपूर्ति बंद की जा रही है। विभागीय अधिकारियों ने इस कार्रवाई की जानकारी संबंधित विभाग प्रमुखों को भी दे दी है।
मोहला के सहायक अभियंता एसके मिलिंद और अंबागढ़ चौकी के सहायक अभियंता बी. कुर्रे ने बताया कि मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के 599 से अधिक सरकारी शिक्षण संस्थानों पर लगभग 41 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया है। भुगतान नहीं होने के कारण चरणबद्ध तरीके से बिजली कनेक्शन काटे जा रहे हैं।

आवंटन के बावजूद भुगतान में देरी
बताया जा रहा है कि सरकारी स्कूलों के भवनों के रखरखाव, रंग-रोगन, फर्नीचर और अन्य व्यवस्थाओं के लिए शासन की ओर से हर वर्ष बजट उपलब्ध कराया जाता है। इसके बावजूद स्कूलों का बिजली बिल समय पर जमा नहीं होना सवाल खड़े करता है। खास तौर पर तब, जब बिजली जैसी मूलभूत सुविधा के बिना स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
डीईओ बोले- जानकारी नहीं
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी योगदास साहू ने बताया कि उन्हें स्कूलों की बिजली काटे जाने की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि आवंटन उपलब्ध होने की स्थिति में विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के माध्यम से बिजली बिल का भुगतान कराया जाएगा।
इन वितरण केंद्रों से काटी गई बिजली
विद्युत विभाग के मुताबिक मोहला, मानपुर, अंबागढ़ चौकी, कौड़ीकसा, दिघवाड़ी, गोटाटोला, डूमरटोला, खड़गांव, सीतागांव, औंधी, वासडी, चिल्हाटी और बाधाबाजार वितरण केंद्रों के अंतर्गत आने वाले सरकारी स्कूलों की बिजली आपूर्ति बकाया भुगतान के चलते रोकी गई है।
शिक्षामंत्री के जिले में विभागीय समीक्षा और प्रशासनिक गतिविधियों के बीच सामने आया यह मामला शिक्षा विभाग की वित्तीय व्यवस्था और स्कूलों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।