प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थान FIITJEE लिमिटेड की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छात्रों से एडवांस फीस लेने और कथित तौर पर उस रकम का दूसरे कार्यों में इस्तेमाल करने से जुड़े मामले में कंपनी और उसके डायरेक्टरों के खिलाफ गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की है।
ED ने FIITJEE लिमिटेड के साथ डायरेक्टर दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल को आरोपी बनाया है। जांच एजेंसी ने कोर्ट से आरोपियों को दोषी ठहराने के साथ जांच के दौरान जब्त और अटैच की गई करीब 71.88 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है।
एडवांस में ली लाखों की फीस, बीच में बंद हुए सेंटर
ED की जांच के मुताबिक, FIITJEE ने JEE समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए संचालित दो से चार साल के कोचिंग प्रोग्राम में छात्रों से पहले ही पूरी या बड़ी रकम फीस के रूप में ली थी। यह राशि प्रति छात्र करीब 2.80 लाख से 3.50 लाख रुपये तक बताई गई है। एजेंसी का आरोप है कि छात्रों को निर्धारित अवधि तक पढ़ाई कराने का भरोसा दिया गया था, लेकिन शिक्षकों और कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलने से कई लोगों ने संस्थान छोड़ दिया। इसके बाद अलग-अलग शहरों में कोचिंग सेंटर बंद होते चले गए।
32 सेंटर बंद, 14,411 छात्र प्रभावित
जांच एजेंसी के अनुसार, मई 2024 से फरवरी 2025 के बीच FIITJEE के 32 सेंटर बंद हुए। इससे करीब 14,411 छात्र प्रभावित हुए, जो पहले ही अपनी कोचिंग फीस जमा कर चुके थे। ED का आरोप है कि संस्थान की वित्तीय स्थिति खराब होने और भविष्य में छात्रों को पूरी कोचिंग उपलब्ध कराने में परेशानी की जानकारी होने के बावजूद नए एडमिशन लिए जाते रहे। एजेंसी के मुताबिक, ऐसे पाठ्यक्रमों में भी दाखिले लिए गए जिनकी अवधि मार्च 2029 तक थी।
₹85.79 करोड़ की फीस को लेकर ED का दावा
ED का दावा है कि छात्रों से ली गई करीब 85.79 करोड़ रुपये की फीस का कथित तौर पर निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने इस रकम को अपराध से अर्जित आय के रूप में चिह्नित किया है। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा नोएडा और ग्रेटर नोएडा तथा मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा भोपाल में दर्ज मामलों के आधार पर शुरू की गई थी। नोएडा पुलिस इस मामले में पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल को आरोपी बनाया गया है। जांच में करीब 300 पीड़ितों, सेंटर संचालकों और अन्य गवाहों के बयान के साथ फीस की रसीदों और संबंधित दस्तावेजों को भी शामिल किया गया है।
डायरेक्टरों की सैलरी पर भी ED ने उठाए सवाल
ED की जांच में कंपनी के डायरेक्टरों को किए गए भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। एजेंसी के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 से दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल ने मिलकर करीब 24.92 करोड़ रुपये वेतन के रूप में लिए। एजेंसी का दावा है कि गोयल परिवार के पास कंपनी की करीब 86.31 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के कारण डायरेक्टरों के वेतन निर्धारण पर स्वतंत्र निगरानी का अभाव था। ED के मुताबिक, दिनेश कुमार गोयल को करीब 56 लाख रुपये प्रतिमाह, जबकि मोनिला गोयल को 25 लाख रुपये से अधिक प्रतिमाह वेतन मिलता था। एजेंसी का आरोप है कि जिस समय कर्मचारियों और शिक्षकों को वेतन मिलने में देरी हो रही थी या भुगतान नहीं हो रहा था, उस दौरान डायरेक्टरों को भुगतान जारी रहा।

