भिलाई में हरिहर श्रीमद् भागवत कथा का पहला दिन: कथावाचिका चैतन्य मीरा बोलीं- श्रीमद् भागवत में छिपा है जीवन का सार… शोभायात्रा से हुई शुरुआत

भिलाई। भिलाई के श्री राधे कृष्ण मंदिर नेहरू नगर ईस्ट भिलाई में श्री बांके बिहारी सेवा समिति द्वारा आयोजित हरिहर श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन भिलाई में श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हो रहा है। कथावाचिका माँ चैतन्य मीरा ने कथा के दौरान कहा कि सावन मास में श्रीमद् भागवत कथा या श्रीराम कथा का श्रवण करना अत्यंत फलदायी होता है, क्योंकि भगवान शिव को विष्णु प्रिय हैं और विष्णु को श्रीराम।

माँ चैतन्य मीरा ने कहा कि कई संतों के लिए श्रीमद् भागवत ही आराध्य ग्रंथ है, क्योंकि यही ग्रंथ हमारे जीवन को श्रीकृष्ण से जोड़ता है, और श्रीकृष्ण श्री राधा के बिना अधूरे हैं। उन्होंने बताया कि श्रीमद भागवत कथा का श्रवण करने के नियम भी होते हैं, जिनका पालन करके संतों ने प्रभु को पाया। कथा के अवसर पर गोस्वामी तुलसीदास की जयंती भी मनाई गई। माँ चैतन्य मीरा ने उन्हें नमन करते हुए कहा कि उनकी ही कृपा से आज श्रीराम जन-जन के हृदय में निवास करते हैं।

उन्होंने उद्धव संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि “जो भी मुझे पाना चाहता है, उसका एकमात्र साधन श्रीमद भागवत है”- यह स्वयं श्रीकृष्ण का वचन है। कथा के समापन पर उन्होंने सभी भक्तों से कहा कि वे संपूर्ण ऊर्जा के साथ प्रभु का सुमिरन करें, ताकि इस सात दिवसीय कथा से जीवन में परिवर्तन लाकर स्वयं व समाज का कल्याण कर सकें।

कथा का शुभारंभ में संजय रूंगटा व उनकी धर्मपत्नी रजनी रूंगटा, और बंसी अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल द्वारा भागवत जी की पूजा से हुआ। प्रातःकाल भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु भक्तिभाव से सम्मिलित हुए। इस शोभायात्रा में प्रमुख रूप से संजय रूंगटा, बंसी अग्रवाल, अनुप बंसल, अनिल अग्रवाल, नंदकिशोर अग्रवाल, सुरेश केजरीवाल, विजय गुप्ता, सुरेश जैन, अरविंद जैन, विष्णु अग्रवाल, मनोज धनबड़िया, विकास अग्रवाल, दिलीप अग्रवाल, सौरभ रैका, कैलाश रूंगटा सहित अनेक श्रद्धालु सहभागी बने। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ श्रीकृष्ण और श्रीराधा की भव्य झांकी के दर्शन किए। पूरे मार्ग में भक्तिरस से सराबोर वातावरण रहा और नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों, शंखध्वनि और भजन-कीर्तन से माहौल भक्तिमय हो गया।

माँ चैतन्य मीरा ने अपने द्वारा संचालित आयुर्वेदिक हॉस्पिटल और रिट्रीट सेंटर की जानकारी भी दी, जहाँ बिना दवाइयों के

मसाज थेरेपी
हाइड्रोथेरेपी
मड़थेरेपी
ओजोन थेरेपी
योग, फिजियोथेरेपी, एक्यूप्रेशर, डाइट थेरेपी, स्टीम और जकूज़ी द्वारा इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि अनुभवी डॉक्टर्स और समर्पित टीम के माध्यम से हजारों लोगों को लाभ मिला है।

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