रायपुर/कांकेर। छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब कांकेर जिले में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक राजनांदगांव में सक्रिय पाया गया। कांकेर एसपी निखिल राखेजा ने प्रधान आरक्षक विजय कुमार पांडेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
कांकेर के DCB/DCRB शाखा में पदस्थ प्रधान आरक्षक विजय कुमार पांडेय अपनी ड्यूटी छोड़कर राजनांदगांव जिले में सक्रिय थे। ताज्जुब की बात यह रही कि वे अपने जिले के अफसरों को सूचना दिए बिना दूसरे जिले में ‘विशेष गतिविधियों’ में संलग्न थे।
कांकेर एसपी निखिल राखेजा द्वारा जारी आदेश के अनुसार:
तत्काल प्रभाव से निलंबन: कर्तव्य से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के कारण प्रधान आरक्षक को सस्पेंड किया गया है। निलंबन की अवधि में विजय पांडेय का मुख्यालय रक्षित केंद्र (पुलिस लाइन) कांकेर रहेगा।
7 दिन में जांच रिपोर्ट: एसपी ने इस मामले में प्राथमिक जांच के आदेश दिए हैं और 7 दिनों के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन मांगा है।
ED की जांच और महादेव सट्टा कनेक्शन
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ ED (प्रवर्तन निदेशालय) की जांच से जुड़ा है। सूत्रों के मुताबिक जांच में सामने आया है कि विजय पांडेय बिना किसी विभागीय अनुमति के दुबई की यात्रा पर गए थे। वहां उन्होंने महादेव सट्टा ऐप के मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर की मेजबानी का आनंद लिया। सिपाही के सट्टा नेटवर्क से जुड़े होने और अवैध लाभ लेने की शिकायतों ने पुलिस विभाग की छवि पर सवाल खड़े कर दिए थे।

पुलिस विभाग में हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद पूरे बस्तर संभाग और राजनांदगांव पुलिस में खलबली मची हुई है। खुफिया चीफ की सख्ती ने यह साफ कर दिया है कि मैदानी स्तर पर अधिकारियों की ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। खासकर महादेव सट्टा जैसे संवेदनशील मामलों में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।