दंतेवाड़ा। देश में नक्सलवाद के खात्मे की तय समय सीमा 31 मार्च नजदीक आते ही छत्तीसगढ़ पुलिस ने बस्तर क्षेत्र में रणनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा के कारली पुलिस लाइन में बस्तर संभाग स्तर की हाई-लेवल बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता डीजीपी अरुण देव गौतम ने की।
करीब चार घंटे तक चली इस मैराथन समीक्षा बैठक में नक्सल विरोधी अभियानों की वर्तमान स्थिति, ताजा इंटेलिजेंस इनपुट, संवेदनशील इलाकों की पहचान और टार्गेटेड एक्शन प्लान पर विस्तार से चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक, अब रणनीति का फोकस फील्ड-आधारित कार्रवाई, त्वरित समन्वय और शेष प्रभाव वाले क्षेत्रों में कंसन्ट्रेटेड ऑपरेशन पर रहेगा।

बैठक में केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों और जिला पुलिस के बीच रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ऑपरेशन के दौरान त्वरित निर्णय और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
डीजीपी गौतम ने स्पष्ट किया कि समीक्षा बैठक को बस्तर में आयोजित करने का उद्देश्य ग्राउंड रियलिटी को समझना और उसी के अनुरूप रणनीति तय करना है। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलियों के लिए आत्मसमर्पण का विकल्प अभी भी खुला है। जो भी सरेंडर करेगा, उसे राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सुरक्षित भविष्य और मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिलेगा।
पुलिस महकमे के संकेत साफ हैं कि आने वाले दिनों में बस्तर संभाग में नक्सल विरोधी अभियान अधिक केंद्रित, तेज और निर्णायक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।