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देश में कोयला संकट के बीच हमारे भिलाई स्टील प्लांट के पास कितना कोयला?...क्या इस संकट में बंद हो जाएगा प्लांट?, पढ़िए ये रिपोर्ट...

देश में कोयला संकट के बीच हमारे भिलाई स्टील प्लांट के पास कितना कोयला?...क्या इस संकट में बंद हो जाएगा प्लांट?, पढ़िए ये रिपोर्ट...  

October 14, 2021

भिलाई। देश में कोयले के भारी संकट को देखते हुए भिलाई इस्पात संयंत्र ने एहतियात बरतना शुरु कर दिया है। संयंत्र में उत्पादन के लिए कोकिंग कोल का पर्याप्त स्टॉक है। कोयले के संकट को देखते हुए इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करने सेल प्रबंधन द्वारा एसईसीएल ( साउथ ईस्टर्न कोल्ड फील्ड) से चर्चा जारी है।

आज हरिभूमि भिलाई ने इस पर लीड स्टोरी की है। जिसमें लिखा है- उल्लेखनीय है कि मानसून की बारिश और कोरोना की दूसरी लहर के लाकडाउन के दौरान मांग में तेजी के कारण देश में कोयले का संकट व्याप्त है। कोयला खदानों से थर्मल प्लाट व अन्य कारखाने इसकी कमी के अभूतपूर्व संकट से जूझ रहे हैं।

देश के 135 संयंत्रों में 106 संयंत्रों क्रिटिकल या अत्यधिक क्रिटिकल स्थिति में होने से ब्लैक आउट की स्थिति बनी हुई है। सरकार ने इसके लिए युद्धस्तर पर प्रयास शुरू कर दिए हैं। सेल के सबसे बड़े उपक्रम भिलाई इस्पात संयंत्र में फिलहाल उत्पादन बाधित होने या ब्लैक आउट जैसे हालात नहीं है। इसकी वजह संयंत्र में कोयले की तुलना में अधिकांश कोकिंग कोल का उपयोग किया जाना है। बीएसपी प्रबंधन सूत्रों के भूताबिक देश में संकट बॉयलर कोल का है ना कि कोकिंग कोल है का है।


सीसीएसओ से होती है आपूर्ति
केन्द्रीय कोयला आपूर्ति संगठन (सीसीएसओ) झारखंड के धनबाद जिले में स्थित सेल को एक यूनिट है। इसके कोलकाता, जसनसोल, आदा और बिलासपुर में कार्यालय है। अपनी कुशल अभक्ति के साथ सीएसओ सेल के इस कारखानों भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर, बोकारो इस्टील प्लांट को दैनिक आधार पर स्वदेशी घुला हुआ कोयला और बायलर लिटी का कोयला पहुंचता है।

इस कार्य के लिए यह भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सोसीटल), रांची, वेट लिमिटेड (डबल्यूसीएल) बगपुर ईस्ट इस लिमिटेड (ईसेएल) सक्टोरिया (पश्चिम बंगाल) दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) बिलासपुर महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल), सम्बलपुर (उड़सा) तथा रेलवे क्षेत्रों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखता है।


एनएसपीसीएल द्वारा संचालित पावर प्लांट-2 में कोयले की जरूरत रहती है। बीएसपी में वर्तमान में 19 से 20 दिन का कोयला उपलब्ध है। सामान्य दिनों में भी इतना ही स्टांक होता है। एहतियातन साउथ ईस्टर्न और पावर प्लांट-2 में है। पावर प्लांट एक कोयले के साथ-साथ गैस से भी चलाया जाता है। संयंत्र में ज्यादा से ज्यादा गैस पर चलाने का प्रयत्न किया जाता है जिससे कोयले की खपत वहां बहुत कम है।


इस मामले में जनसंपर्क विभाग बीएसपी ने बयान देते हुए कहा है, इस्पात संयंत्र पूरी तरह सजन है। चूंकि में कोकिन कोल का इस्तेमाल होता है जिसे तैयार करने में करीबन 88 प्रतिशत इंपोटेड कोल का उपयोग होता है, इसलिए फिलहाल चिंता की बात नहीं है। 20 दिन का कोयला स्टाक है। भविष्य की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एससीईएल और टीसीएसओ से चर्चा चल रही है। दिन प्रतिदिन स्थिति पर नजर है।


कल छत्तीसगढ़ पहुंचे थे देश के कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी...
देश भर में कोयले की कमी के चलते आ रहे बिजली संकट की बात कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी भी स्वीकार करते हैं। छत्तीसगढ़ पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कोयले की कमी हुई है, लेकिन हालात अब सुधर रहे हैं। जितना कोयला बिजली आपूर्ति के लिए चाहिए, वह दिया जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह 20-40 दिन के स्टॉक की बात नहीं कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री कोयला खदानों के निरीक्षण के लिए कोरबा पहुंचे थे।


केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पोस्ट कोविड के बाद मांग में जबरदस्त तेजी आई है। अभी तक हम पावर प्लांट को 1.9 मिलियन कोयला प्रतिदिन दे रहे थे, लेकिन बुधवार को 2.08 मिलियन टन दिया गया। बताया कि अफसरों से कहा है कि पावर प्लांट के लिए जो लक्ष्य तय किया था, उसके मुताबिक उन्हें रोज हर हाल में कोयला देना चाहिए। कहा, पावर प्लांट में 20-40 दिन का स्टॉक तो नहीं होगा, लेकिन जरूरत के हिसाब से कमी नहीं होने देंगे।


कोयला आयात में 30% कटौती, पर डोमेस्टिक उत्पादन 20 फीसदी बढ़ा
केंद्रीय कोयला मंत्री जोशी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने से आयातित कोयले की मात्रा 30 प्रतिशत कम हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि कोल इंडिया ने अपना उत्पादन 20 प्रतिशत तक बढ़ाया है। कोयले में कमी का एक कारण मानसून के लंबे समय तक रहना भी है। कोविड के बाद हमारी इकोनॉमी की रिकवरी बहुत अच्छी हुई। इसके कारण बिजली की मांग अचानक से बढ़ गई। इस पीक स्थिति में कोयले की शॉर्टेज हुई थी।

कोरबा में 8 घंटे खदानों का निरीक्षण और अफसरों की ली बैठक
कोरबा में करीब 8 घंटे तक केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने खदानों का निरीक्षण किया। साथ ही अफसरों की बैठक भी ली। उन्होंने बताया कि मुआवजे के लिए SECL के अफसरों से कहा है। जो लोग भी उसके हकदार हैं और हमारी ओर से रुका है, उसे तत्काल पूरा किया जाए। परिजनों को नौकरी देना है, तो उस समस्या को भी तत्काल दूर करें। कई मामलों में परिजनों की ओर से देर की जा रही है। इसके लिए कलेक्टर और SP को इसमें दखल देकर निराकरण के निर्देश दिए हैं।


छत्तीसगढ़ पूरे देश की जरूरत का 20 प्रतिशत कोयला देता है। यहां कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी साउथ-इस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड (SECL) की 41 खदानें हैं। इसमें से ओपन कास्ट खदानों की संख्या अधिक है। यहां से सालाना 150 लाख मीट्रिक टन कोयले का उत्पादन होता है। कोरबा जिले की ही खदानों से SECL 130 लाख मीट्रिक टन कोयला निकालती है। अफसरों के मुताबिक, कायदे से बिजली कंपनियों को 24 दिन उपयोग के बराबर कोयला स्टॉक रखना होता है।



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