दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अवैध खनन की गतिविधियां तेजी से बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। हाल ही में रिसामा गांव में मुरुम खनन के नाम पर बड़े पैमाने पर पत्थर का उत्खनन किया जा रहा है। सैकड़ों ट्रक अवैध रूप से पत्थर ले जाते हुए देखे जा रहे हैं, जबकि खनिज अधिकारी इस मामले की अनदेखी कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत और खनिज विभाग की मिलीभगत से यह सब हो रहा है, जिसके चलते स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है। वहीं इस मामले में अब जिला खनिज अधिकारी ने भी बयान दिया है।

क्या है हंगामे का कारण?
दो दिन पहले, ग्रामीणों ने रॉयल्टी चोरी और बजरी के बजाय पत्थर निकाले जाने को लेकर कई ट्रकों को रोका और हंगामा किया। खनिज विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति की जांच की, ग्रामीणों ने बताया कि, लेकिन न तो उन्होंने ट्रकों की रॉयल्टी पर्ची की जांच की और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की।
भारत माला परियोजना के तहत खुदाई…
ग्रामीणों का कहना है कि भारत माला परियोजना के तहत तालाब की खुदाई की जा रही है। ग्राम पंचायत ने मुरुम खनन की अनुमति दी है, लेकिन जब पत्थर मिलने लगे, तो उन्हें भी खोदकर ले जाया गया। हंगामा बढ़ने पर, ग्रामीणों ने तालाब की खुदाई का कार्य रोक दिया। 23 सितंबर को एक ट्रक में 14 सितंबर की रॉयल्टी पर्ची मिली, जो कई सवाल उठाती है।
ग्रामीण और गांव की सचिव ने क्या बताया?
पीलेश्वर साहू, एक स्थानीय निवासी, का कहना है कि यह पूरी तरह से अवैध खनन है। उन्होंने बताया कि जब शिकायत के बाद एक अधिकारी मौके पर आया, तो उसने ट्रक चालक से रॉयल्टी पर्ची मांगी, जो कि तिथि के हिसाब से असंगत थी। इसके बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। गांव की सचिव गीता महानंद ने कहा कि तालाब में मुरुम खनन लीज के बाद किया जा रहा है और इसमें कलेक्टर की भी सहमति है। अगर पत्थर खनन की शिकायत है, तो इसकी जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह खनिज विभाग की जिम्मेदारी है कि वे सुनिश्चित करें कि 5000 घनमीटर के परमिशन के बाद मुरुम निकाली जा रही है या पत्थर।
खनिज विभाग ने क्या कहा?
जिला खनिज अधिकारी दीपक मिश्रा ने कहा कि उनकी टीम इस मामले में सतर्क है और शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाती है। उनका दावा है कि उत्खनन का कार्य पूरी तरह से रॉयल्टी के माध्यम से हो रहा है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर अवैध खनन के गंभीर मुद्दे को उजागर किया है, जिससे स्थानीय समुदाय की चिंता बढ़ गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है।