फिजियोथैरेपी में उज्ज्वल भविष्य की अपार संभावनाएं, देश ही नही बल्कि विदेशों में भी मांग, फिजियोथैरेपिस्ट बनने के लिए करें ये कोर्स...

फिजियोथैरेपी में उज्ज्वल भविष्य की अपार संभावनाएं, देश ही नही बल्कि विदेशों में भी मांग, फिजियोथैरेपिस्ट बनने के लिए करें ये कोर्स...  

October 27, 2020

भिलाई। मेडिकल फील्ड में करियर की बात करें तो इस समय फिजियोथैरपी स्ट्रीम में बढ़िया मौकों की संभावनाएं मौजूद हैं। फिटनेस को लेकर लोगों में बढ़ती जागरूकता ने इसके प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ा दी है। साथ ही फिजियोथेरपी को इस समय लाइलाज बीमारियों के लिए कारगर इलाज के रूप में भी देखा जा रहा है। फिजियोथेरपी का कोई साइड इफेक्ट भी नहीं इसलिए इसकी मांग दिनोंदिन बढ़ रही है।

इन दिनों चिकित्सा के क्षेत्र में फिजियोथेरैपी एक वरदान के रूप में उभरी है। दिनों दिन बढ़ रही तंत्रकीय एवं अन्य शारीरिक समस्याओं के कारण फिजियोथेरेपिस्ट की मांग भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में बढ़ी है। फिजियोथेरैपी एक प्रकार की भौतिक चिकित्सा प्रणाली है। जिसमें शारीरिक गतिविधियों का स्मरण, आकलन तथा पुनः स्थापित करती है। फिजियोथेरैपी जन्म से और बाद में बनी शारीरिक विकलांगता, गठियारोग, लकवा, हृदय-श्वसन रोग, आर्गनामिक्स, जराचिकित्सा, खेल संबंधी क्षति एवं सरल प्रसव में सहायता प्रदान करती है।
फिजियोथेरैपी एक अत्याधुनिक शीघ्र प्रगतिशील चिकित्सा पद्धति है जिसमें विशेष व्यायाम, उष्मा चिकित्सा मेनिपुलेशन आदि प्रक्रियाओं से मरीजों का उपचार किया जाता है।

भारत में फिजियोथेरैपी एक उभरता हुआ कैरियर विकल्प है। सरकारी तथा निजी क्षेत्र में फिजियोथेरैपी हेतु विस्तृत रोजगार अवसर उपलब्ध है। समूचे भारत में बहुत से चिकित्सालय, अस्पताल, निजी नर्सिंग होम तथा पुनर्वासन केन्द्र में फिजियोथैरेपिस्ट की मांग रहती है एवं यह स्वतंत्र रूप से निजि क्लिनिक चला सकते है। जिसके कारण स्वरोजगार के अवसर उपलबध होते है। फिजियोथैरेपिस्ट को यू.के. आस्ट्रेलिया, यू.एस.ए. केनेडा, सऊदी अरब, इत्यादि देशों में बहुत अधिक मांग है।
अपोलो कॉलेज के विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालयीन स्तर के परीक्षा मे मेरिट में प्रथम स्थान प्राप्त किये है। डिंपल दीक्षा अग्रवाल (बी.पी.टी प्रथम वर्ष), वंशीका वर्मा (बी.पी.टी द्वितीय वर्ष), अंजुम समनानी (बी.पी.टी तृतीय वर्ष) एवं यशा कृति (बी.पी.टी चतुर्थ वर्ष) ये सभी यूनिवर्सिटी टाॅपर है।

फिजियोथैरेपी पाठ्यक्रम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग छ.ग. शासन रायपुर से मान्यता तथा पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति छ.ग. आयुष एवं स्वास्थ्य विज्ञान वि.वि. से संबद्धता प्राप्त है। अपोलो काॅलेज ऑफ फिजियोथैरेपी, दुर्ग के विद्यार्थी जो कि विभिन्न संस्थाओं में कार्यरत् है।
डाॅ. आकांक्षा पटेल – मेडिकल काॅलेज एंड हाॅस्पीटल, अम्बिकापुर
डाॅ. प्रनेयता साहू – संचालक – सांईराम पेडिआट्रिक थैरेपी एंड रिहाबिलेशन सेंटर, भिलाई
डाॅ. आकांक्षा जोशी – काॅलेज आॅफ फिजियोथैरेपी, वाॅनलेस हाॅस्पीटल, मिराज मेडिकल सेंटर, सांगली, महाराष्ट्र
डाॅ. सुप्रिया गुप्ता – स्पर्श मल्टीस्पेशलिटी हाॅस्पीटल, भिलाई
डाॅ. चंद्रकांत शुक्ला – न्यु उदय मेडिकल सेंटर, गोरखपुर (यू.पी.)
डाॅ. रोशनी – आदित्य हाॅस्पीटल कर्नाटक
डाॅ. हर्ष मोतीरमानी – संजीवनी फिजियोथैरेपी, राजनांदगांव
डाॅ. रंजन कुमार – जीवन ज्योति मल्टीस्पेशलिटी हाॅस्पीटल, अम्बिकापुर
डाॅ. विनीता सिंग – कल्याण मेडिकल सेंटर, रिसाली, भिलाई
डाॅ. ललित सिंघानिया – स्पर्श फिजियोथैरेपी क्लिनिक, चांपा
डाॅ. मोनेन्द्र कुमार – साहू फिजियोथैरेपी, बालोद
डाॅ. पुरूषोत्तम कुमार साहू – ओम सांई आर्थो, फिजियोथैरेपी क्लिनिक, बेमेतरा
डाॅ. नीतू वर्मा –संचालक, लाईफ 360 क्लिनिक, रायपुर
डाॅ. पंकज शाही – मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हाॅस्पीटल, न्यू दिल्ली
डाॅ. सौरभ शर्मा – अपोलो धर्मार्थ फिजियोथैरेपी सेंटर, जिला अस्पताल दुर्ग
डाॅ. माधुरी डी नेहरू-एनसीडी, जिला अस्पताल राजनांदगांव
डाॅ. सी.पी. सेन – बिहार हाॅस्पीटल, रायपुर
डाॅ. द्रिपाल सोनी – जयदीश मल्टीस्पेशलिटी हाॅस्पीटल, मुंबई
डाॅ. रितुराज शुक्ला – श्री नारायना मल्टीस्पेशलिटी हाॅस्पीटल, रायपुर
डाॅ. रूपेश खेडुलकर – महारानी हाॅस्पीटल, जगदलपुर
डाॅ. विशाखा जोशी – जिला चिकित्सालय बलौदा बाजार
डाॅ. निकिता सिंह – अपोलो हाॅस्पिटल, बिलासपुर
डाॅ. मोना पाल – हाई टेक हाॅस्पिटल भिलाई
डाॅ. राजेश के. साहू – सुयष हाॅस्पिटल रायपुर
डाॅ. मुक्तानंद साहू – जिला चिकित्सालय, बलौदाबाजार
डाॅ. पदमन पटेल – जिला चिकित्सालय महासमुंद
डाॅ. ओमकार नेताम – अपोलो धर्माथ फिजियोथैरेपी केन्द्र, दुर्ग
डाॅ. भावना कश्यप- शासकीय हाॅस्पिटल, बिलासपुर
डाॅ. अन्नु कश्यप – शासकीय हाॅस्पिटल, जगदलपुर
डाॅ. साक्शी श्रीवास्तव- क्लीनिक एण्ड रेहब सेंटर, भिलाई
डाॅ. अजय सिंह – मैक्स हाॅस्पिटल, न्यू दिल्ली
डाॅ. योगेश साहू – रेहब एण्ड हेल्थ केयर सेंटर, चम्पा
डाॅ. मुकेश साहू – वी.वाय. हाॅस्पिटल, रायपुर
डाॅ. डी. गिरधर – अपोलो, मेडिकल काॅलेज, हाईदराबाद
डाॅ. आनंद कुमार शर्मा – फिज़ियोथैरेपी क्लीनिक, भिलाई
डाॅ.नेहा राजपूत – जिला अस्पताल, दुर्ग (छ.ग.)
डाॅ. हरेन्द्र शाही – न्यूरोपैथी काॅलेज एण्ड हाॅस्पिटल, नगपुरा
डाॅ. ललिता शुक्ला – देवांता हाॅस्पिटल, शहडोल
डाॅ. बबली मानिकपुरी – मेडीशाईन हाॅस्पिटल, रायपुर
डाॅ. जनमाजय भुआर्य – जिला अस्पताल, गरियाबंद
डाॅ. विक्की अल्फ टोप्पो – जिला अस्पताल, जशपुर
डाॅ. दिव्या साहू – पल्स हाॅस्पिटल, भिलाई
डाॅ. अभिषेक तिवारी – कृष्णा हाॅस्पिटल, कोरबा
डाॅ. अंकिता ठाकुर – शासकीय हाॅस्पिटल, दुर्ग
डाॅ. वंदना सिंह – एम्स, भोपाल
डाॅ. शिबानी डे, डॉ, नेहा शर्मा – अपोलो काॅलेज, दुर्ग,
डाॅ. सुमन सिंह – जिला अस्पताल, सुरजपुर
डाॅ. अलका प्रजापति – लड़ीकर हाॅस्पिटल, बिलासपुर
डाॅ. अजय बामबेसर – एनएलईपी, बालोद
डाॅ. प्रतिभा पांडे – श्री नारायणा हाॅस्पिटल, रायपुर
डाॅ. अनवेशा सरकार – डीकेएस हाॅस्पिटल, रायपुर
डाॅ. तोमेश कुमार देवांगन – फिजियोथैरेपी क्लिीनीक, रायपुर
डाॅ. प्रतिमा लाकरा – रिहैब सेंटर, अंबिकापुर

इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने हेतु NEET में सम्मिलित होना अनिवार्य है। फिजियोथैरेपी पाठ्यक्रम के अध्ययन हेतु आदिम जाति कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा अनु.जनजाति, अनु. जाति, अ.पि.वर्ग के विद्यार्थियों को लगभग 13,000/- एवं SC ST 17,000/- रू की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।


बैचलर ऑफ फिजियोथैरेपी स्नातक पाठ्यक्रम है जिसका अवधि चार वर्ष है, तत्पश्चात छः माह का क्लीनीकल इंटर्नशिप अनिवार्य है। यह इंटर्नशीप छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय अस्पताल, सेक्टर-9 हास्पिटल, अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर तथा अन्य राज्यों के प्रमुख अस्पताल एवं पुनर्वासन संस्था से की जा सकती है।

बी.पी.टी. पश्चात् उच्च अध्ययन हेतु छात्र मास्टर ऑफ फिजियोथैरेपी (एम.पी.टी.) में प्रवेश ले सकता है। अस्थि रोग (आर्थो), तंत्रिका विज्ञान, (न्युरो), खेल विज्ञान (स्पोर्ट्स), हृदय श्वसन रोग (कार्डियो) आदि शाखाओं में विशेषज्ञ बन सकते हैं एवम् विदेशों में भी मास्टर ऑफ साइन्स (एम.एस) कर सकते है। इसमें पी.एच.डी. का भी प्रावधान है। इस फिजियोथैरेपी चिकित्सा प्रणाली के अध्ययन पश्चात  स्वयं का फिजियोथैरेपी क्लिनिक का संचालन भी कर सकते है।

यह एक ऐसी उपचार पद्धति है जिसमें कोई भी उपचार में दवाईयां का इस्तेमाल नही होता बल्कि केवल व्यायाम और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणो से उपचार किया जा सकता है।



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