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सरकार के खिलाफ आक्रामक तेवर के साथ लिखना दैनिक भास्कर को भारी पड़ गया...सुबह-सुबह CBDT की रेड

सरकार के खिलाफ आक्रामक तेवर के साथ लिखना दैनिक भास्कर को भारी पड़ गया...सुबह-सुबह CBDT की रेड  

July 22, 2021

नई दिल्ली। दैनिक भास्कर के कार्यालयों पर आज सुबह से सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डॉयरेक्ट टैक्सेज़ ने छापेमारी की है. BBC के हवाले से खबर है कि, सीबीडीटी की प्रवक्ता सुरभि अहलूवालिया ने बीबीसी से छापोमारी की पुष्टि की है.  सुरभी ने बीबीसी से कहा, ''दैनिक भास्कर के कार्यालयों पर सीबीडीटी का ऑपरेशन जारी है. इस संबंध में अभी हम इतना ही बता सकते हैं.''


ये ऑपरेशन किस बारे में है इस पर सुरभि ने कहा, ''अभी ये जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी.'' BBC ने यह भी लिखा है कि, दैनिक भास्कर के नेशनल एडिटर लक्ष्मी प्रसाद पंत ने बीबीसी को बताया, 'जयपुर दफ्तर में कुछ टीमें पहुंची हैं. वो क्या जांच कर रहे हैं ये हमें अभी नहीं पता है. मैं दफ़्तर पहुंच रहा हूं.'दैनिक भास्कर भारत का चर्चित हिंदी अख़बार है. दैनिक भास्कर ने कोविड महामारी के दौरान कई खोजपरक ख़बरें प्रकाशित की हैं जिनमें सरकारों के कोविड प्रबंधन पर सवाल उठाए गए थे.

 
खबर है कि भोपाल में प्रेस कॉन्प्लेक्स सहित आधा दर्जन स्थानों पर टीम मौजूद है। भोपाल के अलावा इंदौर और जयपुर सहित देश के दर्जनों ठिकानों पर छापे पड़े हैं। दैनिक भास्कर के अहमदाबाद दफ्तर में भी आयकर टीमें मौजूद हैं। सिर्फ़ भोपाल में ही दैनिक भास्कर के 10 ठिकानों पर छापा पड़ा है।


पूरा सर्च ऑपरेशन दिल्ली और मुंबई टीम के द्वारा संचालित किया जा रहा है। भास्कर प्रबंधन ने इस स्थिति में अपनी डिजिटल टीम को work-from-home करने के लिए कह दिया है ताकि काम बाधित न हो। बताया जा रहा है कि सुबह 5 बजे के करीब पहुंची थी ईडी और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की टीम। बाद में स्थानीय पुलिस को बुला लिया गया।

भास्कर जैसे बड़े मीडिया संस्थान पर छापामार कार्रवाई को आवाज़ दबाने का प्रयास माना जा रहा है। इस खबर से मीडिया जगत में हड़कम्प है। भास्कर कार्यालय में मौजूद सभी कर्मचारियों के फोन जब्त कर लिए गए हैं. साथ ही किसी को बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है. छापेमारी की कार्रवाई में 100 से ज्यादा अधिकारी कर्मचारी शामिल है. अब तक की छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है.


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शीतल पी सिंह-
पिछले कई महीनों से दैनिक भास्कर के तेवर बदले हुए थे, वह अकेला हिंदी महासागर में पत्रकारिता कर रहा था। गंगा किनारे बनी क़ब्रों का सच दिखा रहा था, टीकाकरण की सुस्त रफ़्तार की बात कर रहा था- यानी सरकार की दी हुई स्क्रिप्ट नहीं पढ़ रहा था। आज वहां इनकम टैक्स के छापे पड़ गए।

मोदी सरकार को किसी किस्म की लाज शर्म या पर्दा नहीं है, जहां चुनाव होंगे वहां के प्रमुख विपक्षी दल के नेताओं पर छापे पड़ेंगे, पोर्टलों पर चूड़ी कसी जायेगी। हर तरह के मेसेज व्हाट्सएप चैट्स को Pegasus खंगालेगा और जजों को धमका कर या पटा कर फैसले लिखवाए जाएंगे।
मंहगाई आसमान पर रहेगी और आवाज उठाने वाले NSA/UAPA में जेल में। यही रामराज्य है।


विश्व दीपक-
सुबह सुबह ख़बर मिली की इनकम टैक्स ने “दैनिक भास्कर” के सभी प्रमुख कार्यालयों में धावा बोल दिया है. रात से छापेमारी जारी है. पिछले कुछ वक्त से “भास्कर” सरकार को खटक रहा था. महामारी के दौर में “टेलीग्राफ” की नकल ने इस अखबार को लोकप्रियता तो दिलाई लेकिन अग्रवाल बंधु यह भूल गए कि उनके पांव व्यस्था में काफी गहरे धंसे हैं.
जिन राज्यों में यह अख़बार पिछले कुछ सालों में आक्रामक प्रचार और वितरण की वजह से नंबर एक बना, तकरीबन उन सभी राज्यों में बीजेपी पिछले कम से कम दो दशकों से सत्ता में है. उदारीकरण के बाद से ही हिंदी क्षेत्र को “गोबर पट्टी” बनाए रखने में इस अख़बार ने अहम भूमिका निभाई है. फिर भी इनकम टैक्स की रेड का विरोध किया जाना चाहिए.

 
यह बदले की कार्रवाई और झल्लाहट का नतीजा है. इससे यह भी पता चलता है कि सरकार बहादुर अंग्रेजी अख़बार से नहीं डरते. “टेलीग्राफ” जो हेडलाइन लगाना चाहे, लगता रहे. असर तभी होगा जब “भास्कर” रूख बदलेगा.
#RaidOnFreePress #IStandWithDainikBhaskar



रिटायर्ड आईएएस सूर्यप्रताप सिंह ने कहा कि, बच्चा बच्चा जानता था दैनिक भास्कर पर रेड होगी, बच्चा बच्चा अब सरकार की कार्यशैली समझता है। पर आज वक्त है दैनिक भास्कर के साथ खड़े होने का, आज और अभी मैं @DainikBhaskar के E-अख़बार का 12 महीने का सब्स्क्रिप्शन ले रहा हूँ। अब जो सच लिखेगा, वही बिकेगा

ट्वीटर पर कमल कुंदल लिखते हैं- एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि हमारी आलोचना होनी चाहिए और दूसरी तरफ जो अखबार सच दिखाता है उसे परेशान किया जाता है। ढोंग की भी सीमा होती है।


दैनिक भास्कर के सभी दफ़्तरों में आयकर विभाग के छापा, दर्जनों चैनलों को अपने इशारों पर नचाने वाले एक अख़बार का सच तक बर्दाश्त नहीं कर सके। कितने कमजोर, कायर और डरपोक लोग बैठे हैं सरकार में? आपातकाल घोषित क्यूँ नहीं कर देते? अब बचा ही क्या है


ट्वीटर पर Avadhesh Akodia ने लिखा है- केंद्र सरकार से विज्ञापन बंद होने के बावजूद दैनिक भास्कर ग्राउंड रिपोर्टिंग पर दिल खोलकर खर्च कर रहा है। बदले में आयकर विभाग का छापा तो मिलना ही था। 'जागरण' की तरह 'मीठा' बनाने की कोशिश है, लेकिन 'टेलिग्राफ' से भी 'तीखा' बनकर निकलेगा।



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