कोरबा। रजगामार क्षेत्र में 7 वर्षीय बच्ची के अपहरण, अनाचार और हत्या की घटना ने कोरबा में लोगों को झकझोर कर रख दिया है। वारदात के बाद जिले में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। न्याय की मांग को लेकर अलग-अलग वर्गों के लोग सामने आ रहे हैं और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
वकीलों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की ओर से घटना के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मासूम के साथ हुई घटना के दोषियों को कठोर सजा मिलनी चाहिए। साथ ही, जांच के दौरान यदि किसी स्तर पर पुलिस या प्रशासन की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
SP को हटाने की मांग ने पकड़ा जोर
घटना के बाद पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी को कोरबा से हटाने की मांग भी तेज हो गई है। स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों की ओर से पुलिस के कामकाज को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जिले में हत्या, अनाचार, लूट और डकैती जैसी घटनाओं के अलावा रेत, कबाड़ और डीजल चोरी जैसी गतिविधियों पर भी पुलिस प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पाई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बच्ची के लापता होने के मामले में पुलिस पर सवाल
पीड़ित परिवार की ओर से बच्ची के लापता होने के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। परिजनों का आरोप है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए और आखिरकार बच्ची का शव बरामद हुआ। इस घटना के बाद लोगों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए पुलिस को ज्यादा प्रभावी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप, स्वतंत्र पुष्टि नहीं
घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर एसपी को कथित राजनीतिक संरक्षण मिलने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोगों की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि शिकायतों और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि, राजनीतिक संरक्षण से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरे जिले में भेजने के बजाय प्रशासनिक कार्यालय में अटैच करने की मांग
आक्रोशित लोगों की मांग है कि सिद्धार्थ तिवारी को तत्काल कोरबा एसपी के पद से हटाया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें किसी अन्य जिले में पदस्थ करने के बजाय प्रशासनिक कार्यालय में अटैच किया जाना चाहिए। लोगों का कहना है कि इस घटना की गंभीरता को देखते हुए मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच जरूरी है। साथ ही दोषियों को सख्त सजा और यदि किसी स्तर पर लापरवाही साबित होती है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। अब लोगों की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
