बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर की एक अदालत ने ममता और रिश्तों को शर्मसार करने वाली घटना में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपनी ही 5 साल की मासूम सौतेली बेटी की नृशंस हत्या करने वाले आरोपी पिता मन्नू बंजारे को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।
नफरत की भेंट चढ़ी मासूम पायल
यह दिल दहला देने वाला मामला साल 2022 का है। शासन की ओर से पैरवी कर रहे अतिरिक्त लोक अभियोजक देवेंद्र राव सोमावार ने अदालत में बताया कि आरोपी मन्नू अपनी सौतेली बेटी पायल को अपना खून नहीं मानता था और उससे बेइंतहा नफरत करता था।
इसी नफरत के वशीभूत होकर 25 अगस्त 2022 की दोपहर वह मासूम को अरपा नदी में नहलाने के बहाने ले गया। वहां उसने बच्ची को पानी में डुबोकर मार डाला और साक्ष्य छिपाने की नीयत से उसके कपड़े नदी किनारे झाड़ियों में फेंक दिए।
गुमराह करने की कोशिश, पर पुलिस ने बेनकाब किया
वारदात के बाद आरोपी ने बड़ी चालाकी से कहानी रची। जब बच्ची की मां राधिका काम से लौटी, तो मन्नू ने उसे गुमराह किया। बाद में तोरवा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। अगले दिन बच्ची का शव मस्तूरी के पास कर्रा एनीकेट में बरामद हुआ।
पुलिस की तकनीकी जांच और कड़ी पूछताछ के आगे आरोपी ज्यादा देर टिक नहीं सका। उसने अपना जुर्म कबूल किया और उसकी निशानदेही पर पुलिस ने घटना के समय बच्ची द्वारा पहनी गई फ्रॉक भी बरामद की।
वैज्ञानिक साक्ष्यों ने पलटा पासा
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि बच्ची की मौत नदी में नहाते समय डूबने से हुई थी। लेकिन अतिरिक्त लोक अभियोजक ने कोर्ट के समक्ष 13 महत्वपूर्ण गवाहों और वैज्ञानिक (Scientific) रिपोर्ट पेश की, जिससे यह साबित हुआ कि यह महज हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी।
कोर्ट का फैसला: उम्रकैद और जुर्माना
तथ्यों और साक्ष्यों पर गौर करने के बाद अदालत ने आरोपी मन्नू बंजारे को धारा 302 के तहत दोषी पाया।
- सजा: आजीवन कारावास।
- जुर्माना: 1000 रुपये का अर्थदंड (जुर्माना न भरने पर 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास)।
इस फैसले ने समाज में एक कड़ा संदेश दिया है कि रिश्तों के कत्ल और मासूमों के खिलाफ क्रूरता करने वालों को कानून कभी नहीं बख्शता।

