रायपुर। नकटी में प्रस्तावित विधायक आवास परियोजना को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आवास मंत्री ओपी चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि नकटी में विधायक आवास से संबंधित प्रस्ताव कोई नया निर्णय नहीं है, बल्कि इसका फैसला तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर राजनीतिक षड्यंत्र के तहत उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
ओपी चौधरी ने कहा कि विधायक आवास से जुड़े निर्णय किसी विभागीय मंत्री या हाउसिंग बोर्ड द्वारा नहीं लिए जाते। यह फैसला विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और दोनों दलों के वरिष्ठ सदस्यों की समिति द्वारा किया जाता है। उन्होंने बताया कि उस समय की बैठक में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष (वर्तमान में चरणदास महंत) सहित सभी संवैधानिक पक्ष मौजूद थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि नकटी की संबंधित भूमि आज भी राजस्व भूमि है, न कि हाउसिंग बोर्ड की भूमि। ऐसे में इस मामले को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल को दिया जवाब
आवास मंत्री चौधरी ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल से कहा है कि उनके पास शासन-प्रशासन और राजनीति का लंबा अनुभव है। उन्हें यह अच्छी तरह पता है कि विधायक कॉलोनी से जुड़े फैसले न तो हाउसिंग बोर्ड लेता है और न ही कोई विभागीय मंत्री। इसलिए यदि इस विषय में कोई आपत्ति या सुझाव है तो संबंधित समिति के समक्ष ही पत्राचार किया जाना चाहिए न कि विभागीय मंत्री को निशाना बनाया जाए। ओपी चौधरी ने कहा कि इस विषय पर निर्णय लेने का अधिकार किसी विभागीय मंत्री के पास नहीं है। जनता पूरी सच्चाई जानती है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से भ्रमित नहीं होगी।