गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के एक निजी हॉस्पिटल में गर्भवती महिला की डिलवरी के बाद उसे और नवजात को बंधक बनाकर रख लिया गया था। पीड़ित परिवार भुजिया जनजाति से है। धर्मगढ़ स्थित मां भंडारणी क्लिनिक में डिलवरी के बाद 15 हजार नहीं चुकाने पर उन्हें 6 दिन तक बंधक बनाकर रखा गया।
मैनपुर की रहने वाली नवीना चींदा (23 साल) को प्रसव का दर्द उठने पर परिवार उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचा। वहां नॉर्मल डिलवरी होने पर 20 हजार का बिल बना। परिवार सिर्फ 5 हजार ही चुका पाया, 15 हजार कहीं से भी लाकर देने की बात कही। पीड़िता की सास पैसों के इंतजाम के लिए गांव वापस लौटी।
मामला मीडिया के संज्ञान में आते ही अस्पताल प्रबंधन ने पीड़ित परिवार को छोड़ दिया। जवाब लेने जब पत्रकार संचालक के पास पहुंचे तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि परिवार ने पैसों की दिक्कत बताई होती तो उन्हें पहले ही जाने देते। वहीं, संचालक चैतन्य मेहेर ने कैमरा भी बंद करवा दिया जिसके बाद मां नवजात को एंबुलेंस से वापस गांव भेजा गया।

मामले में अस्पताल संचालक चैतन्य मेहेर ने सफाई देते हुए कहा कि, उन्हें किसी भी प्रकार से किसी पैसे की मांग नहीं की गई। उनके द्वारा हमें दिक्कतों की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। जब तक रही स्टाफ ने उनका पूरा ख्याल रखा है। अगर वे पैसों की दिक्कत बताते तो उन्हें पहले ही जाने दे दिए होते, पर उन्होंने अंतिम समय तक कुछ भी नहीं बताया।
जच्चा बच्चा कार्ड नहीं था : मितानिन
गांव में उस वार्ड की मितानिन पार्वती ध्रुव ने बताया कि, 6वां महीने के गर्भ में वो गांव आई। 7 वे महीने में जांच की गई। जरूरी दवाएं और पौष्टिक आहार दिया गया था। पंजीयन कार्ड खत्म हो गया था, इसलिए उसका जच्चा बच्चा कार्ड नहीं बनाया जा सका। पहले प्रसव सिजेरियन था, इसलिए दूसरे में भी वो उसी अस्पताल चल दी। किसी को इसकी जानकारी नही थी।

