पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन, राजकीय सम्मान के साथ गनियारी में होगा अंतिम संस्कार, पीएम मोदी, सीएम साय, भूपेश बघेल ने जताया शोक

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोककला और पंडवानी गायन को विश्व मंच पर पहचान दिलाने वाली प्रख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई का रविवार तड़के निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ थीं और रायपुर एम्स में उपचाररत थीं। रविवार सुबह करीब 3:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

एम्स से उनके पार्थिव शरीर को दुर्ग जिले के गनियारी गांव स्थित पैतृक गांव लाया गया है, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुबह करीब 11:30 बजे पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए मुक्तिधाम ले जाया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए उनके शिष्य, ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, कलाकार और बड़ी संख्या में प्रशंसक पहुंच रहे हैं।

पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान

डॉ. तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, सशक्त अभिनय और अनूठी प्रस्तुति शैली से महाभारत की कथाओं को जीवंत कर पंडवानी गायन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने भारत के अलावा एशिया, यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक देशों में अपनी प्रस्तुतियों से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का परचम लहराया।

लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नृत्य शिरोमणि, कला शिरोमणि सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। विभिन्न विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डी.लिट. की उपाधि भी प्रदान की थी।

लोककला जगत के लिए अपूरणीय क्षति : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक जताया है। उन्होंने ट्वीटर पर पोस्ट कर कहा है कि डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और भारतीय लोककला के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी अथक साधना और अद्वितीय प्रतिभा से पंडवानी को गांव की चौपाल से निकालकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उनके निधन से कला जगत ने अपना एक अमूल्य सितारा खो दिया है।

मुख्यमंत्री साय ने जताया शोक

मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि “सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोककला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।”

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दी श्रद्धांजलि

भूपेश बघेल ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की अनमोल रत्न, महान पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन प्रदेश ही नहीं, पूरे देश के कला और संस्कृति जगत की बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने गायन से पंडवानी परंपरा को जीवंत रखा और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व पटल पर गौरवान्वित किया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति दें।”

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