दुर्ग में आज से खुल गया दादा-दादी, नाना-नानी पार्क: अब नए स्वरूप में आ गया पार्क, विधायक वोरा और मेयर बाकलीवाल ने किया विजिट…तस्वीरों में देखिए कितना सुंदर बन गया हमारे शहर का पार्क

दुर्ग। दादा-दादाी, नाना-नानी पार्क…ये पार्क आज का नहीं है। बरसो पुराना पार्क है। नगर निगम दुर्ग ने इसकी तस्वीर बदल दी है। इसे सुंदर बना दिया है। नगर पालिक निगम सीमा अंतर्गत शहर के ह्दय स्थल दादा दादी,नाना नानी पार्क का विधायक अरुण वोरा, महापौर धीरज बाकलीवाल, छग राज्य पिछड़ा वर्ग के उपाध्यक्ष आरएन वर्मा पार्क का जायजा लिया और आज से दादा- दादी,नाना-नानी पार्क को आम जनता को समर्पित किया।


दादा- दादी नाना-नानी का नए सिरे से कायाकल्प का जिम्मा विधायक अरुण वोरा, महापौर धीरज बाकलीवाल एवं आयुक्त हरेश मंडावी ने लिया था। जिसे बखूबी मूर्तरूप दिया जा रहा है। शहर के नागरिको को सुकून के दो पल बिताने एवं परिवार के साथ मनोरंजन हेतु इस पार्क को सजाया व सवारा जा रहा है।


इस पार्क में नागरिकों को देखने को मिलेगी रंग बिरंगी रौशनियों से निखरा दादा दादी,नाना नानी पार्क को आज से जनता के लिए खुला गया। इस दौरान एमआईसी सदस्य अब्दुल गनी,दीपक साहू, संजय कोहले, पार्षद भास्कर कुंडले, उद्यान निरीक्षक अनिल सिंह, अजय मिश्रा, राजकुमार पाली, विकास यादव मौजूद थे।

दादा दादी नाना नानी पार्क इसमे जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका व मेहनत रंग ला रही है। पर्यावरण व उद्यानिकी विभाग प्रभारी सत्यवती वर्मा भी लगातार इस कार्यों की मॉनिटरिंग कर रही है। महापौर बाकलीवाल एवं आयुक्त मंडावी के द्वारा समय-समय पर दादी, नाना नानी पार्क का जायजा अधिकारियों के साथ लगातार लिया जा रहा है।

अधिकारियों को सुंदर ढंग से बेहतर काम करने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। जिसके फलस्वरूप आज दादा-दादी, नाना-नानी नए स्वरूप में निखर रहा है। शीघ्र जनता को समर्पित किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में स्थित दादा-दादी, नाना-नानी पार्क छत्तीसगढ़ के हलचल भरे पर्यटन स्थलों में से एक है। पार्क को एक अनोखा नाम मिला है जिसका मतलब है। दादाजी और दादी का पार्क।

थ्री पार्क में प्लेज़ोन, आराम से बैठने का क्षेत्र है। पार्क बच्चों और परिवारों के लिए एकदम सही जगह है। यह छत्तीसगढ़ के दुर्ग के प्रसिद्ध स्थानों में से एक है।

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