नई दिल्ली। कई परिवारों के लिए आर्थिक प्रगति किसी बड़े व्यवसाय या उच्च वेतन वाली नौकरी से शुरू नहीं होती। यह एक हुनर, एक छोटे से अवसर, प्रशिक्षण की उपलब्धता, या केवल यह जानने से शुरू होती है कि सही सरकारी सहायता कहाँ मिलेगी। यह विशेष रूप से कारीगरों, स्कूल छोड़ने वाले युवाओं, महिलाओं, पारंपरिक शिल्पकारों और उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है जिनके पास प्रतिभा तो है लेकिन औपचारिक अवसरों तक सीमित पहुँच है।
इस आवश्यकता को पहचानते हुए, भारत सरकार ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना, प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम विकास) के तहत कई पहलों को एक साथ समाहित किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कौशल विकास, उद्यमिता, शैक्षिक सहायता, महिला नेतृत्व और पारंपरिक विरासत के संरक्षण के माध्यम से भारत के छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में सुधार करना है।
यह योजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विकास को केवल वित्तीय सहायता के नज़रिए से नहीं देखती। इसका दृष्टिकोण अधिक व्यापक है—लोगों को उपयोगी कौशल देना, उनकी कमाई की क्षमता में सुधार करना, उन्हें बाज़ार और ऋण (क्रेडिट) से जुड़ने में मदद करना, महिलाओं को सशक्त बनाना और उन लोगों को शैक्षिक अवसर प्रदान करना जो पीछे छूट गए हैं।

पीएम विकास अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की पाँच पूर्व योजनाओं—सीखो और कमाओ, उस्ताद (USTTAD), हमारी धरोहर, नई रोशनी और नई मंज़िल—को एक साथ लाती है। इस एकीकृत योजना को 15वें वित्त आयोग की अवधि के लिए अनुमोदित किया गया था और 2022 में औपचारिक रूप से इसे ‘पीएम विकास’ नाम दिया गया था। यह एकीकरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वंचित समुदायों द्वारा सामना की जाने वाली कई चुनौतियाँ आपस में जुड़ी हुई हैं। एक युवा को शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण दोनों की आवश्यकता हो सकती है। एक कारीगर को बेहतर कौशल के साथ-साथ ऋण और बाज़ार तक पहुँच की आवश्यकता हो सकती है।
एक महिला उद्यमी को नेतृत्व प्रशिक्षण, वित्तीय समझ और व्यावसायिक सहायता की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए पीएम विकास सीखने से लेकर कमाने तक (learning to earning) का एक अधिक संपूर्ण मार्ग तैयार करने का प्रयास करती है।
पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए यह कार्यक्रम बहुमूल्य हुनर को संरक्षित रखने के साथ-साथ उन्हें व्यावसायिक रूप से अधिक व्यावहारिक बनाने में मदद कर सकता है। प्रशिक्षण से कारीगरों को अपने उत्पादों को बेहतर बनाने, आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने, बाज़ार की मांग को समझने और नए अवसरों का पता लगाने में मदद मिल सकती है। सरकार इस योजना को कौशल प्रशिक्षण, उद्यमिता, शिक्षा और विरासत संरक्षण के माध्यम से अल्पसंख्यक कारीगरों को समर्थन देने वाली योजना के रूप में रेखांकित करती है।
इस व्यापक दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा “कौशल से अवसर तक” का विचार है। कौशल विकास का वास्तविक मूल्य केवल तभी है जब यह किसी व्यक्ति को रोज़गार खोजने, व्यवसाय शुरू करने, आय बढ़ाने या अधिक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद करे। पीएम विकास कौशल और शैक्षिक सहायता प्रदान करती है जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यक युवाओं को उपयुक्त रोज़गार प्राप्त करने या स्व-रोज़गार में सक्षम बनाना है। यह योजना राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (NMDFC) के कार्यक्रमों के साथ ऋण लिंकेज का भी प्रावधान करती है। यह जुड़ाव विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्होंने प्रशिक्षण पूरा कर लिया है लेकिन उद्यम शुरू करने या विस्तार करने के लिए जिनके पास पर्याप्त पूँजी नहीं है। प्रशिक्षण कौशल प्रदान करता है, और ऋण उस कौशल का व्यावसायिक रूप से उपयोग करने का साधन प्रदान कर सकता है।
आज के समय में आर्थिक अवसर डिजिटल ज्ञान से तेज़ी से जुड़ रहे हैं। किसी व्यक्ति के पास सिलाई, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण या अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कौशल हो सकता है, लेकिन बुनियादी डिजिटल समझ के बिना उन्हें ग्राहक खोजने, डिजिटल भुगतान करने, उत्पादों का विज्ञापन करने या सरकारी सेवाओं तक पहुँचने में कठिनाई हो सकती है। यही कारण है कि डिजिटल जागरूकता आधुनिक कौशल विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। सरकार के व्यापक ‘स्किल इंडिया’ परिवेश में अब ‘स्किल इंडिया डिजिटल हब’ शामिल है—एक ऐसा डिजिटल मंच जिसका उद्देश्य कौशल, शिक्षा, रोज़गार और उद्यमिता के अवसरों को जोड़ना है। इसलिए अल्पसंख्यक युवाओं के लिए डिजिटल जागरूकता पारंपरिक कौशल और आधुनिक अर्थव्यवस्था के बीच एक सेतु बन सकती है।
महिलाएँ पीएम विकास का एक अन्य महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु हैं। इस योजना में अल्पसंख्यक महिलाओं के नेतृत्व और उद्यमिता विकास को विशेष रूप से शामिल किया गया है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि महिलाएँ अक्सर कढ़ाई, सिलाई, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, बुनाई और अन्य गतिविधियों के माध्यम से घरेलू आय में बड़ा योगदान देती हैं, लेकिन उनका काम प्रायः अनौपचारिक और कम मान्यता प्राप्त ही रह जाता है। उद्यमिता, वित्तीय प्रबंधन और नेतृत्व में प्रशिक्षण महिलाओं को इन गतिविधियों को स्थायी उद्यमों में बदलने में मदद कर सकता है। जब एक महिला स्वतंत्र रूप से कमाने की क्षमता हासिल कर लेती है, तो उसका लाभ अक्सर बेहतर शिक्षा, पोषण और रहन-सहन के स्तर के रूप में पूरे परिवार तक पहुँचता है।
पीएम विकास में स्कूल छोड़ने वाले (ड्रॉपआउट) बच्चों के लिए एक शिक्षा घटक भी शामिल है। इसका उद्देश्य ऐसी शैक्षिक और कौशल सहायता प्रदान करना है जो युवाओं को पुनः उत्पादक शिक्षा और रोज़गार के मार्गों से जुड़ने में मदद कर सके। यह उन युवाओं के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है जिन्होंने गरीबी, पारिवारिक परिस्थितियों या अन्य कठिनाइयों के कारण स्कूल छोड़ दिया था। यह दूसरा अवसर उन्हें शिक्षा और औपचारिक अर्थव्यवस्था से स्थायी रूप से अलग-थलग होने से बचा सकता है।
पीएम विकास का वास्तविक महत्व विरासत, शिक्षा, कौशल, उद्यमिता और रोज़गार को आपस में जोड़ने के इसके प्रयास में निहित है। किसी कारीगर के लिए पारंपरिक शिल्प के संरक्षण का अर्थ आर्थिक रूप से कमज़ोर बने रहना नहीं होना चाहिए। पीएम विकास और ‘कौशल से अवसर तक’ का यह दृष्टिकोण केवल सहायता पर आधारित कल्याण से क्षमता और अवसर पर आधारित कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। कौशल को डिजिटल जागरूकता, शिक्षा, उद्यमिता, ऋण और बाज़ार की पहुँच के साथ जोड़कर, ऐसी पहलें अल्पसंख्यक समुदायों को भारत के आर्थिक विकास में अधिक पूर्ण रूप से भाग लेने और एक समावेशी व कुशल भारत के व्यापक विज़न में योगदान देने में मदद कर सकती हैं।
लेखक — इंशा वारसी
फ्रैंकोफोन एवं पत्रकारिता अध्ययन विभाग,
जामिया मिलिया इस्लामिया।