भिलाई। बीएसपी अपनी जमीन पर होने वाले कब्जेधारियों के खिलाफ सख्त हो गया है। लेकिन कई मामलों में बीएसपी का कान्फिडेंस ओवर भी नजर आ रहा है। ताजा मामला खुर्सीपार इलाके के तेल्हानाला के बगल में स्थित जमीन का है।

जहां पर एक दुकान (अस्थाई गैरेज) संचालित है। जिसे बीएसपी ने सील कर दिया है। बीएसपी प्रबंधन के अधिकारियों को इतना भी नहीं पता था कि इस जमीन पर हाईकोर्ट ने स्टे दिया है। यानि कि जब तक पूरे मामले की सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक इसमें कोई कार्रवाई नहीं होगी। लेकिन बीएसपी अधिकारियों को इसकी फिक्र कहां? उन्होंने आज कार्रवाई कर दी। वो भी सील बंद की कार्रवाई। 
बीएसपी की इस कार्रवाई पर प्रभावित लोगों ने सवाल उठाया है। इस कार्रवाई से प्रभावित आईए दास ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनके वकील अजीत पिल्लई कहते हैं कि, 40 साल पुराने मामले में कार्रवाई समझ से परे है। जबकि, इस मामले में 8 अप्रैल को ही स्टे आ चुका है।

उस सुनवाई में बीएसपी की ओर से भी वकील खड़े थे। बावजूद स्टे को दरकिनार कर बीएसपी प्रबंधन ने कार्रवाई की है। यह कार्रवाई गलत है। सीधे तौर पर बीएसपी ने कोर्ट का अवमानना किया है। हम बीएसपी समेत संबंधित जिम्मेदारों को अवमानना का नोटिस भेज रहे हैं।

चूंकि, 40 साल पुराने मामले में आज कार्रवाई समझ से परे है। इतने दिनों से बीएसपी प्रबंधन क्या कर रहा था? वकील का कहना है कि, इस मामले में हमारा पक्षकार कहीं कोई गलत नहीं है। बीएसपी प्रबंधन ये कार्रवाई गलत की है। हालांकि, बीएसपी की ओर से अब तक कोई पक्ष नहीं आया है।

वहीं बीएसपी से जुड़े लोगों का कहना है कि, तेल्हानाला के पास में ये जमीन बीएसपी की है। 42 सालों से इस पर कब्जा था। 21000 से ज्यादा स्क्वेयरफीट जमीन पर कारखाना संचालित किया जा रहा है। जो अवैध है। बीएसपी संपदा न्यायालय से इस कारखाने के खिलाफ आदेश पारित हुआ था। कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई हुई है।



