रायपुर। मध्य पूर्व में जारी तनाव और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के बीच रायपुर के एक युवक ने मौत के साए में लगभग तीन महीने बिताने के बाद सुरक्षित घर वापसी की है। मर्चेंट नेवी में कार्यरत रुद्रांश चौबे ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंस गए थे। सुरक्षित लौटने के बाद उन्होंने अपने खौफनाक अनुभव साझा किए।
रुद्रांश एक व्यापारिक जहाज पर तैनात थे, जो 32 हजार मीट्रिक टन यूरिया लेकर भारत लौट रहा था। इसी दौरान मध्य पूर्व में बढ़े सैन्य तनाव और हमलों के चलते उनका जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में फंस गया। जहाज पर कुल 22 क्रू सदस्य मौजूद थे।

रुद्रांश ने बताया कि उस दौरान हर तरफ मिसाइलों और ड्रोन की गतिविधियां दिखाई और सुनाई देती थीं। कई बार हालात इतने तनावपूर्ण हो जाते थे कि जहाज पर मौजूद सभी लोगों को अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगती थी। आसपास से गुजरने वाली मिसाइलों की आवाज सुनकर दिल दहल जाता था और यह डर बना रहता था कि कहीं उनका जहाज भी किसी हमले का शिकार न हो जाए।
उन्होंने बताया कि इस दौरान परिवार से लगातार संपर्क बना हुआ था, लेकिन वे वास्तविक स्थिति नहीं बताते थे। परिवार पहले ही टीवी और समाचारों के माध्यम से क्षेत्र की परिस्थितियों को लेकर चिंतित था। ऐसे में पूरी सच्चाई बताने से उनकी चिंता और बढ़ सकती थी।
करीब 90 दिन तक तनावपूर्ण माहौल में रहने के बाद रुद्रांश और उनके साथी सुरक्षित भारत लौटने में सफल रहे। रायपुर पहुंचने पर परिजनों और दोस्तों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। घर लौटने के बाद रुद्रांश ने अपने परिवार को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और बताया कि किस तरह उन्होंने मौत के खतरे के बीच दिन गुजारे।
रुद्रांश की आपबीती सुनकर परिवार भी भावुक हो गया। परिजनों ने उनसे भविष्य में ऐसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में ड्यूटी करने से बचने की अपील की है। वहीं रुद्रांश का कहना है कि यह उनके जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण और भयावह अनुभव रहा, जिसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे।