रायपुर। मुख्यमंत्री द्वारा राजधानी रायपुर के तेलीबांधा चौक का नाम परिवर्तन करने की घोषणा के बाद इस निर्णय को लेकर विरोध के स्वर सामने आने लगे हैं। प्रदेश युवा प्रकोष्ठ के सचिव मुकेश साहू ने तेलीबांधा चौक का नाम बदले जाने की घोषणा का कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि तेलीबांधा नाम केवल एक स्थान का नाम नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सामाजिक पहचान, परंपरा और विशेष रूप से साहू समाज के इतिहास एवं गौरव से जुड़ा हुआ है।
मुकेश साहू ने कहा कि तेलीबांधा नाम को हटाकर किसी अन्य नाम से चौक की पहचान स्थापित करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि तेलीबांधा स्थान का नाम बदलने की कोशिश की गई तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी ऐतिहासिक एवं सामाजिक पहचान से जुड़े नाम को बदलने से पहले स्थानीय नागरिकों और संबंधित समाज की भावनाओं एवं ऐतिहासिक संदर्भों का सम्मान किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तेलीबांधा चौक की पहचान वर्षों से इसी नाम से रही है। इस नाम के साथ स्थानीय इतिहास, सामाजिक स्मृतियां और लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में केवल प्रशासनिक अथवा राजनीतिक निर्णय के आधार पर इसका नाम बदलना उचित नहीं होगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि तेलीबांधा चौक के नाम को यथावत रखा जाए और इस संबंध में किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए।
छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़े नामों के संरक्षण की मांग
मुकेश साहू ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ की परंपरा, इतिहास और संस्कृति से जुड़े प्रतीकों एवं नामों में बदलाव की घटनाएं सामने आती रही हैं। उनके अनुसार, तेलीबांधा चौक का नाम परिवर्तन इसी व्यापक चिंता का एक उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान रही है और यहां के स्थानों, चौक-चौराहों तथा ऐतिहासिक प्रतीकों के नाम स्थानीय इतिहास और समाज की स्मृतियों को प्रतिबिंबित करते हैं। इसलिए विकास या प्रशासनिक पुनर्गठन के नाम पर ऐसे नामों को बदलने से पहले उनके सामाजिक और ऐतिहासिक महत्व पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
मुकेश साहू ने कहा कि तेलीबांधा नाम को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा कि उसे हटाकर कोई दूसरा नाम स्थापित कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल नाम परिवर्तन का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की स्थानीय पहचान और ऐतिहासिक स्मृतियों के संरक्षण का विषय है।
सरकार से निर्णय को वापस लेने का मांग
प्रदेश युवा प्रकोष्ठ के सचिव ने मुख्यमंत्री एवं राज्य सरकार से मांग की कि तेलीबांधा चौक के नाम परिवर्तन की घोषणा पर पुनर्विचार किया जाए तथा तेलीबांधा नाम को यथावत रखा जाए।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार द्वारा नाम परिवर्तन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है तो प्रदेश के सामाजिक संगठनों, युवाओं और नागरिकों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा संस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़े नामों के संरक्षण की मांग करना होगा।
मुकेश साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की मिट्टी, परंपराओं, लोक संस्कृति, सामाजिक इतिहास और वर्षों से प्रचलित नामों से बनती है। इसलिए इन पहचान-चिह्नों को संरक्षित रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने पुनः दोहराया कि तेलीबांधा चौक का नाम किसी भी परिस्थिति में बदला नहीं जाना चाहिए और यदि नाम परिवर्तन का प्रयास किया गया तो प्रदेश युवा प्रकोष्ठ इसके विरोध में व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन करेगा।