दुर्ग संभाग ने साहू समाज को फिर से दिया प्रदेश अध्यक्ष: कभी राजनीतिक पार्टियों से चुनाव नहीं लड़ेंगे साहू समाज के प्रदेश अध्यक्ष टहल साहू…आरक्षण को लेकर ही बड़ी बात

भिलाई। समाज की राजनीत में आगे बढ़ने के बाद लोग अक्सर राजनीतिक दलों की राजनीत में कूद जाते हैं। ऐसा देखने को मिलता है। वो चाहे किसी भी समाज में हो। कल साहू समाज के प्रदेश अध्यक्ष समेत अन्य पदों के लिए चुनाव हुआ। साहू समाज को कल नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया। स्व. अर्जुन हिरवानी के निधन के बाद प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव हुआ।

टहल साहू चुनाव जीत गए। टहल बालोद से आते हैं। दुर्ग संभाग के अंतर्गत आने वाले बालोद से ही अर्जुन हिरवानी भी आते थे। साहू समाज की राजनीत में दुर्ग संभाग का दबदबा पहले से रहा है। स्व. ताराचंद साहू से लेकर गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू की सक्रियता इस बात का सबूत है।


कल सबसे ज्यादा 57 मत टहल साहू को मिले और इसी के साथ छत्तीसगढ़ साहू समाज का नेतृत्व अब टहल साहू के हाथों में है। इस चुनाव में 60 से अधिक उम्मीदवारों ने दावेदारी की थी, प्रदेश के हर जिले से साहू संघ की जिला इकाई के तीन-तीन पदाधिकारियों ने इस चुनाव में वोट डाला।

इन तीन पदाधिकारियों के वोट को साहू समाज का वोट माना गया और इन्हीं में से टहल अध्यक्ष चुनकर आए। उपाध्यक्ष पद पर भुवनेश्वर साहू को जीत मिली और उपाध्यक्ष महिला के पद पर मोहन कुमारी साहू को जीत हासिल हुई।

चुनाव जीतने के बाद कल मीडिया से टहल साहू ने बात की। मीडिया को दिए इंटरव्यू में टहल ने कहा है कि, वे छत्तीसगढ़ साहू समाज के स्वर्गीय अर्जुन हिरवानी जी के बताए मार्ग पर चलेंगे। उनके अधूरे कामों को पूरा करना मकसद है।

कहा, मेरी कोशिश होगी कि मैं साहू समाज को एकता के सूत्र में पिरो सकूं। मैं कभी किसी राजनीतिक पार्टी से टिकट नहीं मांगूंगा और न ही चुनाव लड़ूंगा। आरक्षण के लिए भी हम संघर्ष करेंगे हमारा बेहद बड़ा समाज है। हम पिछड़ा वर्ग से आते हैं 27% आरक्षण की आवाज को हम बुलंद करेंगे।

फिलहाल साहू समाज को 14% आरक्षण छत्तीसगढ़ में मिलता है। लगातार समाज की तरफ से इसे बढ़ाए जाने की मांग की जा रही है। मगर अदालती दांवपेच में आरक्षण का मुद्दा अटक चुका है।

टहल ने बताया कि उनकी प्राथमिकता होगी कि वह आरक्षण के मामले को भी सुलझा सकें। इसके लिए सरकार से चर्चा की जाएगी। आरक्षण हासिल करने के लिए जो भी कानूनी मुश्किलें होंगी उसे समाज के लोगों की तरफ से हल करने का प्रयास करेंगे।

छत्तीसगढ़ में बड़ी तादाद में लोग साहू बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं ।अब तक इसके अध्यक्ष रहे अर्जुन हिरवानी का जनवरी के महीने में तबीयत बिगड़ने की वजह से निधन हो गया था।

अध्यक्ष का पद खाली था, इसलिए यह चुनाव करवाया गया । अर्जुन हिरवानी बालोद जिले के रहने वाले थे और नए अध्यक्ष टहल भी बालोद जिले के ही रहने वाले हैं।

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू भी इसी समुदाय से आते हैं। सरकार में बड़े पद पर हैं। साहू समाज के इस चुनाव पर उनकी पूरी नजर बनी हुई थी। साफ जाहिर है कि साहू समाज का प्रतिनिधित्व प्रदेश के सियासी समीकरणों पर भी असर डालता है । नई कार्यकारिणी से राजनीतिक दल भी आने वाले चुनाव में कई उम्मीदें बांधे बैठे हैं।

छत्तीसगढ़ के साहू समाज की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ दिन पहले कि कुछ समय पहले ओबीसी राष्ट्रीय कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदेश के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू को बनाया गया था।

छत्तीसगढ़ के ढाई करोड़ से अधिक जनता में 52 फ़ीसदी ओबीसी वर्ग से आते हैं । इसमें सबसे बड़ी संख्या साहू समाज की है। समाज के नेताओं के मुताबिक प्रदेश में लगभग 20 से 22 फ़ीसदी से अधिक लोग साहू हैं।

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