रूंगटा यूनिवर्सिटी में अब AI से सीखेंगे स्टूडेंट्स: पहली बार एआई बेस्ड मैनीक्वीन से फार्मेसी छात्रों को दी जाएगी पेशेंट काउंसलिंग की ट्रेनिंग

भिलाई। छत्तीसगढ़ के फार्मेसी छात्र ड्रग डिलीवरी, दवाई का प्रभाव और पेशेंट की काउंसलिंग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से सीखेंगे। इसके लिए रूंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ फार्मेसी में इस साल से फार्मेसी के विद्यार्थियों को एआई मैनीक्वीन मॉडल के जरिए प्रैक्टिकल नॉलेज दिया जाएगा। जिस तरह मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस के छात्रों को शरीर की संरचनाओं को समझाने के लिए शवों का डिसेक्शन (डेड बॉडी एक्सपीरिमेंट) कराया जाता है।

ठीक वैसी ही ट्रेनिंग फार्मेसी के छात्रों को भी मिलेगी। यहां इसके लिए एआई बेस्ड मैनीक्वीन मॉडल इस्तेमाल होगा। यह मॉडल बिल्कुल मानव शरीर की तरह होगा, जो ड्रग डिलीवरी के सटीक रिजल्ट देने में सक्षम है। फार्मेसी के छात्र इस मॉडल के साथ रियल काउंसलिंग सेशन कर सकेंगे। इसे दवाई देने पर मैनीक्वीन में क्या क्या बदलाव हो रहा है, उसे स्क्रीन पर तुंरत देखा जा सकेगा। छात्र पेशेंट की हार्टबीट की जांच से लेकर बॉडी टेम्प्रेचर जैसे हर पहलू को प्रैक्टिकल करके सीखेंगे। बीमारी के दौरान शरीर कैसे रिएक्ट करता है, यह भी एआई मैनीक्वीन समझा देगी।

मैनीक्वीन से सीखेंगे पेशेंट काउंसलिंग
यह मॉडल पूरी तरह से वॉइस असिस्टेंट की तरह काम करेगा, जो छात्रों को खुद बताएगा कि, उसके शरीर में क्या समस्या आ रही है, बॉडी के अंदर क्या चल रहा है और इसके लिए शुरुआती ट्रीटमेंट या दवा क्या होनी चाहिए। इस एआई मैनीक्वीन को रूंगटा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ फार्मेसी की फैकल्टी डॉ. पराग जैन ने विकसित किया है, जिसमें रूंगटा ग्रुप के डायरेक्टर आरएंडडी डॉ. एजाजुद्दीन का सहयोग रहा। उन्होंने बताया कि, यह मैनीक्वीन हूबहू इंसानों की तरह है, जिसे कई सारे सेंसर्स की मदद से तैयार किया गया है। जिस तरह इंसान का दिल धड़कता है, ठीक वैसे ही इस मैनीक्वीन में लगाया सिस्टम की पंप करता है, जिसे विद्यार्थियों की ट्रेनिंग के दौरान कम या अधिक करके उन्हें हार्ट फंग्शन के बारे में समझाया जा सकता है।

मैनीक्वीन के लिए मिली सरकारी मदद
डॉ. पराग जैन ने बताया कि, वे इसे एक स्टार्टअप की तरह से तैयार कर रहे हैं जिसे अन्य फार्मेसी कॉलेजों को भी दिया जा सकता है। इस एआई मैनीक्वीन को तैयार करने के लिए भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय ने १४.८२ लाख रुपए की शुरुआती फंडिंग भी जारी की है। स्टार्टअप के इस प्रोडक्ट को लेकर ट्रेडमार्क और कंपनी रजिस्ट्रेशन करा लिया गया है। इसके अलावा प्रोडक्ट की पेंटेंट के लिए भेजा गया है। दरअसल, फार्मेसी की पढ़ाई के दौरान पेशेंट काउंसलिंग कोर्स का हिस्सा है, जिससे फार्मा छात्र मेडिकल की शुरुआती समझ हासिल करते हैं। आम तौर पर मेडिकल रिसर्च या ट्रेनिंग के लिए जीवित व्यक्ति का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, ऐसे में यह एआई मैनीक्वीन बेहद फायदेमंद साबित होगा। फार्मेसी के छात्र इससे पल्स रेट मैपिंग, सलाइन चढ़ाना और इंजेक्शन लगाने का सही तरीका भी सीखेंगे।

फीड किया जा रहा डाटा
रूंगटा स्कूल ऑफ फार्मेसी की डायरेक्टर डॉ. मधुलिका प्रधान ने बताया कि, यह एआई मैनीक्वीन मॉडल फार्मेसी के छात्रों को मानव शरीर की संरचना और उसके अंगों की गहराई से समझ प्रदान करता है। उन्हें क्लिनिकल स्किल्स में भी महारत हासिल होगी। इस मॉडल की ट्रेनिंग के तौर पर इसमें लाखों तरह का डाटा फीड किया जा रहा है। दरअसल, फार्मेसी के सिलेबस में छात्रों को पेशेंट काउंसलिंग और ड्रग डिलीवरी सिस्टम जैसे कोर्स कंटेंट पढ़ाने होते है, जिसे अकसर थ्योरी में पढ़ाया जाता है, लेकिन इस पहल के बाद छात्र इसे सामने होते हुए लाइव देखेंगे। उनको ऐसा लगेगा जैसे वे किसी व्यक्ति के साथ बैठकर अपनी रिसर्च कर रहे हैं।

काउंसलिंग की शुरुआत 13 से होगी
प्रदेश के फार्मेसी कॉलेजों में प्रवेश के लिए काउंसलिंग का आगाज 13 अक्टूबर से होगा। इसमें बी.फार्मेसी, डी.फार्मेसी और एम.फार्मेसी के विद्यार्थी शामिल होंगे। पहले चरण की काउंसलिंग के लिए ऑनलाइन आवेदन 18 अक्टूबर तक भरे जाएंगे। इससे पहली मेरिट सूची का प्रकाशन 24 अक्टूबर को किया जाएगा। इसके बाद 25 अक्टूबर तक दावा-आपत्ति के लिए समय दिया जाएगा। प्रथम चरण की सीटों का आवंटन 29 अक्टूबर को होगा। जिन विद्यार्थियों को सीट आवंटित हो जाएगी, उनको 30 अक्टूबर से लेकर 4 नवंबर तक कॉलेज पहुंचकर एडमिशन लेना होगा। दूसरे चरण की शुरुआत 7 नवंबर से होगी और 10 नवंबर तक आवेदन करने होंगे। दूसरी मेरिट सूची 12 नवंबर को आएगी। विद्यार्थी 13 नवंबर तक दावा-आपत्ति करेंगे। फिर 15 नवंबर को सीटों का आवंटन होगा। आवंटन सूची में शामिल विद्यार्थियों को 16 से 19 नवंबर तक तय कॉलेजों में जाकर प्रवेश की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

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