“स्वयंसिद्धा” द्वारा समर स्पेशल ‘कच्ची धूप’ क्लास का आयोजन: स्लम क्षेत्र की बच्चियों को कराया BSF DIG कैंप का भ्रमण… जवानों से बच्चों ने सीखा देश भक्ति का जज्बा

भिलाई। “सर मैं देश के लिए काम करना चाहती हूं लेकिन मुझे नहीं पता मैं दसवीं के बाद क्या करूँ?, “सर मेरे घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है I मेरे पिता का देहांत हो चुका है। लेकिन मैं अपने पांव पर खड़े होने के साथ देश के भी काम आना चाहती हूं। लेकिन मुझे नहीं पता कि सही रास्ता कौन सा है?” दुर्ग जिले के रिसाली स्थित सीमा सशस्त्र बल (BSF) के हेड क्वार्टर मे 15 से 22 वर्ष की बच्चियों ने यह सवाल पूछे जब स्वयंसिद्धा की स्लम क्लास ‘कच्ची धूप’ की लड़कियों को बीएसएफ रिसाली के हेड क्वार्टर भ्रमण के लिए लेकर जाया गया।

संस्था प्रमुख डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ने बताया कि हम सभी बच्चों से बहुत सी उम्मीदें करते हैं उनके लिए बहुत खर्च भी करते हैं लेकिन एक ऐसी आबादी है जो श्रमिक बस्तियों में रहती है I यहां के बच्चों को पता ही नहीं है कि उनको आगे क्या करना चाहिएI खास तौर पर लड़कियों की शादी कर दी जाती है और उन्हें चूल्हा चक्की में पिसने को छोड़ दिया जाता है I उनकी प्रतिभा को कभी भी सही दिशा नहीं मिल पाती इसीलिए इस बार हमारे समर क्लास के तहत यहां की लड़कियों को हम बीएसएफ के भ्रमण हेतु लाए हैं।

आईजी ने स्वयं सारी बच्चियों को उपहार व स्वलपाहार के पैकेट वितरित किए व उनके सवालों के जवाब दिये जिससे बच्चियां भविष्य के प्रति आशान्वित हुई I यही नहीं बीएसएफ ने बच्चियों की फिटनेस और मानसिक प्रशिक्षण के लिए भी कक्षाओं का शुभारंभ किया जिससे कच्ची धूप की बच्चियों के लिए नए मार्ग खुलेI सोनाली चक्रवर्ती ने आगे बताया कि मध्यम व उच्च वर्ग के बच्चे तो समर क्लास के नाम पर कई चीजे सीख लेते हैं लेकिन श्रमिक बस्तियों के बच्चे स्कूल की छुट्टी होने पर इधर-उधर घूमते हैं व गलत संगत में पड़कर बुरी आदतों का शिकार होते हैं इसीलिए स्वयंसिद्धा प्रत्येक वर्ष इन बच्चों के लिए समर क्लास का आयोजन करती है जिसमें उन्हें व्यक्तित्व विकास से लेकर थिएटर व संगीत की ट्रेनिंग दी जाती हैI इस वर्ष बीएसएफ के साथ जुड़ने से बच्चों में एक नया उत्साह व आत्मविश्वास जागा है। इस कार्यक्रम मे आईजी, मनीष व रोशनी भगत के साथ शिल्पी शर्मा, वर्षा, नेहा सिन्हा,निकिता गुप्ता, प्रियंका सिन्हा, रश्मिका आदि उपस्थित थे।

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