महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में नाबालिग छात्रा के साथ अशोभनीय हरकत और बैड टच करने के मामले में फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने आरोपी शिक्षक को दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने शिक्षक जैसे जिम्मेदार पद और गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते का गंभीर दुरुपयोग किया है।
अपर सत्र न्यायाधीश मोनिका जायसवाल की अदालत ने आरोपी गणेशराम चंद्राकर को पॉक्सो अधिनियम की धारा 10 के तहत दोषी पाते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना जमा नहीं करने पर आरोपी को तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने आरोपी शिक्षक को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 के तहत भी दोषी करार दिया। इस मामले में अदालत ने तीन वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं एक साथ (Concurrent) चलेंगी।

गणित की कक्षा में हुई थी शर्मनाक हरकत
अभियोजन के अनुसार, 8 जनवरी 2025 को पीड़ित नाबालिग छात्रा ने महासमुंद थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। छात्रा ने पुलिस को बताया कि गणित की कक्षा के दौरान शिक्षक गणेशराम चंद्राकर कथित रूप से नशे की हालत में था और उसने उसके साथ अनुचित स्पर्श (बैड टच) किया।शिकायत के बाद पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना। अदालत ने कहा कि शिक्षक समाज में सम्मानित स्थान रखता है और विद्यार्थियों की सुरक्षा व संरक्षण उसकी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में आरोपी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर छात्रा के साथ अशोभनीय हरकत करना गंभीर अपराध है।