लोग दिल्ली के ट्रेन्चिंग ग्रांड से करने लगे थे भिलाई के डंपिंग जोन की तुलना, मेयर देवेंद्र की पहल पर कचरे का किया निष्पादन, डंपिंग जोन हुआ खाली, आप भी देखे पहले और अब की तस्वीर

 लोग दिल्ली के ट्रेन्चिंग ग्रांड से करने लगे थे भिलाई के डंपिंग जोन की तुलना, मेयर देवेंद्र की पहल पर कचरे का किया निष्पादन, डंपिंग जोन हुआ खाली, आप भी देखे पहले और अब की तस्वीर  

October 16, 2020

भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र का एक ऐसा डंपिंग साइट जिसमें वर्ष 1995 से समस्त जोन क्षेत्र के कचरे को एकत्र कर निरंतर कचरा डाला जाता रहा है। यह डंपिंग साइट अब धीरे-धीरे समाप्ति की ओर है। भिलाई निगम के संपूर्ण क्षेत्र से निकलने वाला कचरा कुरूद के ट्रेंचिंग ग्राउंड में डाला जाता रहा है। वहां कचरा इस कदर जमा हो गया था कि 200-300 मीटर के क्षेत्र में बदबू का आलम हो गया था। रहवासी परेशान थे। साथ ही इस रास्ते से गुजरना मुमकिन नहीं था। कचरे का ढेर 25 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया था। इस स्थल पर वाहनों का आवागमन तो दूर व्यक्ति के खड़े होने की जगह नहीं बची थी। चारों ओर केवल कचरा ही कचरा नजर आता था। कचरे के ढेर के ऊपर से हाईटेंशन तार गुजरने के कारण आए दिन कचरे में आग लगने की शिकायत प्राप्त होने लगी। उस दौरान 300 टन कचरा प्रतिदिन पूरे निगम क्षेत्र से निकलकर सीधे ट्रेंचिंग ग्राउंड में पहुंचता था। तब एक भी एसएलआरएम सेंटर निगम क्षेत्र में नहीं बना था, जिससे कचरे का निष्पादन किया जाता।


इन परिस्थितियों को देखते हुए महापौर एवं भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने कुरूद स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड के डंपिंग साइट को पूर्ण रूप से समाप्त करने का फैसला लेते हुए अधिकारियों को कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। वर्ष 2016 में निगम क्षेत्र में पहला एसएलआरएम सेंटर नेहरू नगर ऑक्सीडेशन पॉन्ड में तैयार किया गया। जिसके तैयार होने से कचरे के ढेर में कमी होने लगी। एक एसएलआरएम सेंटर होने के कारण कुरूद का कचरा डंपिंग साइट को पूर्ण रूप से समाप्त करना एक बड़ी चुनौती थी। महापौर देवेंद्र यादव के निर्देश पर वर्ष 2018 में डंपिंग साइट को पूर्णत: विलोपित करने का कार्य प्रारंभ किया गया। सिस्टम था बायोरेमेडीएशन जैसी आधुनिक तकनीक का।

डंपिंग साइट समाप्त करने की कड़ी चुनौती को महापौर ने स्वीकार करते हुए कार्य प्रारंभ कराया और प्रतिदिन 10 टन कचरे की छनाई शुरू हुई, इसमें से 2 टन खाद के अलावा, पॉलिथीन तथा अन्य प्रकार के कचरे अलग अलग होते गए, कचरा का ढेर धीरे-धीरे समाप्त होने लगा। इसी बीच खुर्सीपार सहित अन्य क्षेत्रों में एसएलआर सेंटर का निर्माण हुआ। कुरूद स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड का कचरा धीरे-धीरे सिमटने लगा। ट्रेंचिंग ग्राउंड से निर्मित हुए खाद को विक्रय किया गया और अब तक 700 टन खाद तैयार होकर विक्रय हो चुका है, जिससे निगम को 15 लाख 40 हजार का राजस्व प्राप्त हुआ है।

आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी ने निगम की पदस्थापना के बाद से ही इस पर फोकस किया और लगातार फीडबैक लेते रहे अब स्थिति यह है कि कुरूद स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड का कचरे का ढेर 80 से 90% तक समाप्त किया जा चुका है। संबंधित ठेकेदार ने बताया कि बचे हुए कचरे को जल्द ही समाप्त कर दिया जाएगा।



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