रायपुर। राजधानी रायपुर के नकटी गांव में सोमवार को अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासन और पुलिस की टीम का ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया। भारी पुलिस बल और बुलडोजर के साथ पहुंची टीम को ग्रामीणों के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच झूमाझटकी हुई, जबकि कुछ लोगों ने बुलडोजर पर पत्थरबाजी भी की। मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
जानकारी के अनुसार, प्रशासन ने दो दिन पहले गांव के प्रभावित परिवारों को अतिक्रमण हटाने के संबंध में नोटिस जारी किया था। नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद सोमवार को प्रशासन बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचा। कार्रवाई शुरू होते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। कई ग्रामीण बुलडोजर के सामने खड़े हो गए और कार्रवाई रोकने की कोशिश की।

बताया जा रहा है कि नकटी गांव में करीब 70 से अधिक मकान हैं, जिन्हें प्रशासन अतिक्रमण की श्रेणी में मान रहा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सेक्टर-30 में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। घरों का सामान शिफ्ट करने के लिए वाहन मौके पर तैनात किए गए हैं और सामान लोड करने का काम भी जारी है।
ग्रामीणों का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर वे वर्षों से रह रहे हैं, वह उनके पूर्वजों की है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार इस भूमि पर विधायकों के लिए कॉलोनी विकसित करना चाहती है, इसलिए उन्हें जबरन हटाया जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि गांव के कई मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए हैं, ऐसे में उन्हें अवैध कब्जाधारी बताना उचित नहीं है।
ग्रामीणों के अनुसार, संबंधित भूमि ‘शामिलात चारागाह’ के रूप में दर्ज है, लेकिन वे लंबे समय से यहां निवास कर रहे हैं और उनके परिवार पीढ़ियों से इसी क्षेत्र में बसे हुए हैं।
प्रशासन का पक्ष
वहीं प्रशासन का कहना है कि ग्रामीणों ने सरकारी चारागाह भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। इसी कारण नियमानुसार नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध कराने की बात कही है। फिलहाल गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और प्रशासन की कार्रवाई जारी है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।