Click to Get Latest Covid Updates

Vat Savitri Vrat 2021: जिस दिन है वट सावित्री व्रत उसी दिन लगने जा रहा है साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें महिलाएं कब और कैसे करें पूजा

Vat Savitri Vrat 2021: जिस दिन है वट सावित्री व्रत उसी दिन लगने जा रहा है साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें महिलाएं कब और कैसे करें पूजा  

June 8, 2021

Vat Savitri Vrat 2021:  हिंदू पंचांग के अनुसार, वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन रखा जाता है. इस दिन महिलाएं पति की दीर्घायु और संतान के उज्जवल भविष्य के लिए व्रत रखती हैं.

इस साल वट सावित्री का व्रत 10 जून 2021 को मनाया जाएगा. इसके अलावा इस दिन साल 2021 का पहला सूर्य ग्रहण भी लगने जा रहा है. साथ ही इस दिन शनि जयंती भी मनाई जाएगी.

वट सावित्री व्रत और सूर्य ग्रहण दोनों एक ही दिन पड़ रहे हैं. सूर्य ग्रहण के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है. ऐसे में बहुत सी महिलाओं के मन में सवाल है कि क्या इस दौरान पूजा की जा सकती है या नहीं. आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...

आपको बता दें कि 10 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण अमेरिका, यूरोप और एशिया में आंशिक तौर पर दिखाई देगा जबकि ग्रीनलैंड, उत्तरी कनाडा और रूस में पूर्ण सूर्य ग्रहण का नजारा देखने को मिलेगा.

इस बार का सूर्य ग्रहण भारत के केवल अरुणाचल प्रदेश में आंशिक तौर पर दिखाई देगा. इसलिए, हिंदू पंचांग के अनुसार, विवाहित स्त्रियां वट सावित्री व्रत की पूजा पूरे विधि -विधान के साथ कर सकते हैं. उनके पूजा करने में किसी प्रकार का दोष नहीं होगा.

कब और क्यों मनाया जाता है ये व्रत?

इस व्रत को ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को रखा जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन अपने मृत पति को पुनः जीवित करने के लिए सावित्री ने यमराज से याचना की थी जिससे प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें उनके पति सत्यवान के प्राण लौटा दिए थे.

इसी के साथ यमराज ने सावित्री को तीन वरदान भी दिए थे. इन्हीं वरदान को मांगते हुए सावित्री ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर अपने पति को जीवित करवा दिया था.

बताया जाता है कि यम देवता ने सत्यवान के प्राण चने के रूप में वापस लोटाए थे. सावित्री ने इस चने को ही अपने पति के मुँह में रख दिया था जिससे सत्यवान फिर से जीवित हो उठे थे. यही वजह है कि इस दिन चने का विशेष महत्व माना गया है.

वट सावित्री व्रत पूजन सामग्री

बांस की लकड़ी से बना बेना (पंखा), अगरबत्ती या धूपबत्ती, लाल और पीले रंग का कलावा, पांच प्रकार के फल, बरगद पेड़, चढ़ावे के लिए पकवान, अक्षत, हल्दी, सोलह श्रृंगार, तांबे के लोटे में पानी, पूजा के लिए साफ सिन्दूर और लाल रंग का वस्त्र पूजा में बिछाने के लिए.

मुहूर्त

अमावस्या तिथि का प्रारम्भ 9 जून 2021 को दोपहर 01:57 बजे से होगा और इसकी समाप्ति अमावस्या तिथि पर 10 जून 2021 को शाम 04:22 बजे पर होगी. उदया तिथि में अमावस्या तिथि 10 जून को है इसलिए यह व्रत 10 जून को करना ही शुभ है.

पूजा विधि

  • इस दिन सुबह-सुबह महिलाएं जल्दी उठकर स्नान कर साफ सुथरे वस्त्र धारण कर लें. फिर सम्पूर्ण श्रृंगार करें.
  • इसके बाद एक बांस या फिर पीतल की टोकड़ी में पूजा का सारा सामान रख लें और घर में ही पूजा करें.
  • पूजा के बाद भगवान सूर्य को लाल पुष्प के साथ तांबे के बर्तन से अर्घ्य दे.

  • इसके बाद घर के पास मौजूद वट वृक्ष पर जाए। वट वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें. देवी सावित्री को वस्त्र और श्रृंगार का सारा सामान अर्पित करें.
  • पेड़ पर फल व पुष्प अर्पित करें. फिर वट वृक्ष को पंखा झेलें। इसके बाद रोली से वट वृक्ष की परिक्रमा करें.
  • अंत में सत्यवान सावित्री की कथा करें या सुनें. साथ ही पूरे दिन व्रत रखें.

  • कथा सुनने के बाद भीगे हुए चने का बायना निकालकर उसपर कुछ रूपए रखकर सास को देने की भी प्रथा है.
  • इस दिन ब्राह्मणों को वस्त्र तथा फल आदि वस्तुएं बांस के पात्र में रखकर दान करें.



विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन


समाचार और भी...