क्या दीपक बैज होंगे कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष ? छत्तीसगढ़ के दिग्गज नेताओं के दिल्ली बुलावे से अटकले हुई तेज… सांसद ने कुमारी सैलजा से की मुलाकात… प्रदेश अध्यक्ष के रेस में इनका नाम भी है शामिल

रायपुर। इन दिनों छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल में फेरबदल और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद पर बदलाव जल्द हो सकता है। प्रदेश के दिग्गज कांग्रेस नेताओं का दिल्ली बुलावे से संगठन में सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष के दावेदारों को दिल्ली बुलाया गया है, माना जा रहा है कि जल्द ही किसी एक नाम पर मुहर पार्टी हाईकमान लगा सकता है। हालांकि जो शुरुआती जानकारी मिली है, उसके मुताबिक बस्तर सांसद दीपक बैज का नाम आगे चल रहा है। आज प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा से दीपक बैज ने मुलाकात भी की है। वहीं कांकेर विधायक शिशुपाल सोरी और बस्तर से विधायक लखेश्वर बघेल को भी दिल्ली बुलाया गया है। हालांकि इस दावेदारी में मंत्री अमरजीत भगत के नामों की भी चर्चा है। विदित हो कि इसी मुद्दे पर दिल्ली में कांग्रेस महासिचव वेणुगोपाल के साथ प्रदेश कांग्रेस के दिग्गजों की बैठक हुईं, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नामों विचार किया गया।

दीपक बैज ने इससे पहले कल दिल्ली में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भी मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद आज दीपक बैज की कुमारी सैलजा के साथ मुलाकात हुई है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी जल्द दिल्ली जा सकते हैं, जहां प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर अंतिम तौर पर रायशुमारी होगी। हालांकि स्पष्ट है कि आदिवासी वर्ग से ही कोई ना कोई प्रदेश अध्यक्ष बनेगा। दावेदारों के तौर पर अमरजीत भगत का भी नाम सामने आ रहा है। हालांकि उन्हे दिल्ली बुलाये जाने की जानकारी अभी नहीं आयी है।

बस्तर से सांसद दीपक बैज को प्रदेश का अगला अध्यक्ष बनने का दावा सबसे मजबूत है। बैज की बात करें तो वह राज्य के युवा नेता हैं, आदिवासी वर्ग से आने के साथ-साथ वो बस्तर के क्षेत्र में जमीनी नेता के तौर पर जाने जाते हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में छत्तीसगढ़ की बस्तर लोकसभा सीट से संसद के निचले सदन लोकसभा के लिए चुने गए थे. गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में 11 में से केवल दो सांसद कांग्रेस के चुने गए थे और उनमें से एक बस्तर से दीपक बैज और दूसरी कोरबा से ज्योत्सना महंत थी। उनके नाम की चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि आलाकमान ने दीपक बैज को इस वक्त दिल्ली बुलाया है और बस्तर के बड़े आदिवासी चेहरों में से एक हैं। सांसद बनने से पहले वे कई बार विधायक भी रह चुके हैं। 27 साल में विधायक का चुनाव जीतने के बाद वे छत्तीसगढ़ के सबसे युवा विधायक भी बने थे। इसलिए प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में उनका नाम सबसे आगे है।

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