भिलाई: महिला सहकारिता सम्मेलन में उमड़ा मातृशक्ति का सैलाब, 800 से अधिक प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

भिलाई | छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और सहकारिता आंदोलन को नई धार देने के उद्देश्य से सहकार भारती (छत्तीसगढ़) द्वारा आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय महिला सहकारिता सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सेक्टर-7 स्थित ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शांति सभागार में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई 800 से अधिक महिला प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

मुख्य अतिथि का संबोधन: “समाज के हर क्षेत्र में अग्रणी है मातृशक्ति”

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने दीप प्रज्वलन कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा:

“आज मातृशक्ति समाज के हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही है। महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक उत्थान में सहकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार की योजनाएं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और सहकार भारती जैसे संगठन इस दिशा में सेतु का कार्य कर रहे हैं।”

सहकारिता के ‘पंच परिवर्तन’ पर जोर

सहकार भारती की राष्ट्रीय महिला प्रमुख रेवती ताई शेन्दुर्निकर ने सहकारिता के माध्यम से समाज सुधार के “पंच परिवर्तन” का मंत्र दिया। उन्होंने निम्नलिखित पांच बिंदुओं पर प्रकाश डाला:

  1. स्वदेशी: स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना।
  2. पर्यावरण: प्रकृति संरक्षण।
  3. सामाजिक समरसता: समाज में एकता।
  4. कुटुंब प्रबोधन: पारिवारिक मूल्यों की रक्षा।
  5. नागरिक कर्तव्य: देश के प्रति उत्तरदायित्व।

📋 संगठन की मजबूती के लिए नई नियुक्तियों की घोषणा

सम्मेलन के दौरान संगठन के विस्तार और कार्यों को गति देने के लिए प्रदेश स्तर पर नए दायित्वों की घोषणा की गई:

  • स्मिता दोड़के: प्रदेश संयोजक (महिला प्रकोष्ठ)
  • पूजा पांडे: प्रदेश सह-संयोजक
  • डॉ. रोशन ताम्रकार: प्रदेश कोषाध्यक्ष
  • डॉ. अनुज कुमार नारद: प्रदेश संयोजक (FPO)
  • दीपक मिश्रा: दुर्ग संभाग संयोजक
  • अंजू मटियारा: महिला संयोजक (मत्स्य प्रकोष्ठ)

आयोजन की झलकियां

  • सांस्कृतिक गौरव: कार्यक्रम का प्रारंभ छत्तीसगढ़ राज्य गीत और समापन ‘वंदे मातरम्’ के साथ हुआ।
  • विशिष्ट उपस्थिति: विधायक रिकेश सेन, ब्रह्माकुमारी आशा दीदी, समाजसेवी रजनी विजय बघेल सहित सहकारिता क्षेत्र के दिग्गज पदाधिकारी उपस्थित रहे।
  • रणनीतिक चर्चा: दो सत्रों में चले इस सम्मेलन में मत्स्य, बैंकिंग, डेयरी, जल प्रबंधन और स्वयं सहायता समूहों (SHG) में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

यह सम्मेलन प्रदेश में सहकारिता के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

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