मदर्स डे के दिन दुर्ग की लेड़गी बाई की कहानी: मजदूरी और सब्जी बेच कर 6 बेटियों को अकेले पढ़ाया… सभी की लगी सरकारी जॉब! इस मां ने 50 साल पहले ही समझ ली थी पढ़ाई की ताकत; प्रेरणा से भरी हैं इनकी दास्तां…

भिलाई। आज मदर्स डे हैं। मई महीने का दूसरा रविवार दुनिया भर तमाम माताओं को समर्पित होता है। इस खास दिन को Mother’s Day के रूप में मनाया जाता है। यानी इस वर्ष मदर्स डे आज, 12 मई को मनाया जा रहा है। आज हम आपको दुर्ग की एक ऐसी मां की कहानी बताने वाले हैं, जिनकी कहानी सुन आप भी प्रेरित हो जाएंगे। ये कहानी हैं दुर्ग के लुचकी पारा में रहने वाली लगभग 90 साल की लेड़गी बाई की, जिन्होंने आज से 50 साल पहले ही बेटियों को पढ़ाने का महत्व समझ लिया था। सत्तर-अस्सी के दशक में जब सामान्य परिवारों को बेटियों का 10-11वीं तक पढ़ना भी कॉमन नहीं होता था, बेटियां कॉलेज जाने लग जाए तो समाज में बवाल हो जाता था, माता-पिता को लोग ताने मारने लगते थे कि लड़कियां इतना पढ़-लिख कर क्या करेंगी? तब सिर पर ईंट, रेत ढोकर गुजर-बसर करने वाली अनपढ़ लेड़गी ने अपनी छह बेटियों को ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट तक पढ़ाया और अपने पैरों में खड़े होने के काबिल भी बनाया।

बाकी परिवार की तरह उनका परिवार भी चाहता था कि सभी बेटियां बड़ी हो और उसकी शादी कर फर्ज निभा लिया जाए, मगर मां लेड़गी बाई को यह मंजूर नहीं था। लेड़गी ने 45-50 साल पहले ही बेटियों की पढ़ाई का महत्व समझ लिया था। तभी उन्होंने ठान लिया था कि चाहे जो भी हो जाए वो अपनी बेटियां को ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन तक तो पढ़ाएंगी ही। उनके इसी जज्बे और साेच का नतीजा है कि आज उनकी सभी बेटियां सेटल हैं। बेटियां अपने सभी भाई-बहनों की सफलता के पीछे मां की मेहनत और उनके त्याग को मानती हैं।

कैंसर की वजह से गुजर गए थे पति, रेजा और सब्जी बेचने का कार्य करती थी लेड़गी बाई
उनकी बेटियां बताती हैं कि स्कूली शिक्षा के दौरान ही उनके पिता कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो गए थे। पिता के गुजरने के बाद उनकी मां संघर्ष करती रहींं। कभी हिम्मत नहीं हारी। वह दिनभर रेजा का काम करती थी। कभी सिर पर ईंटों का बोझ तो कभी रेत की तगाड़ी लादे कई मंजिल ऊपर चढ़ती थी। इतने में परिवार का खर्चा पूरा नहीं होता था, तो सब्जी का पसरा लगातीं। लेकिन बेटियों की पढ़ाई से कभी समझौता नहीं की। बेटियों को भी कभी नहीं लगा कि उनकी मां पढ़ी-लिखी नहीं हैं। 90 साल की उम्र में आज भी वैसा ही तेज दिमाग और अनुशासन प्रिय हैं।

6 में से 5 बेटियां की लगी सरकारी नौकरी
उनकी पांच बेटियां अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी पर हैं। 1982 ग्रेजुएट करने वाली निर्मला साहू उद्यानिकी विभाग में अधीक्षक के पद पर रहीं। सालभर पहले ही रिटायर हुई हैं। 1985 में इकॉनामिक्स में पोस्ट ग्रेजुएट देवकी साहू और भगवती साहू दोनों अभी महिला एवं बाल विकास विभाग में सुपरवाइजर हैं। एमए और नर्सिंग करने वाली चित्रलेखा साहू स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ हैं। उतई स्कूल में कॉमर्स की लेक्चरर ओमलता साहू एम कॉम, एमए और बीएड की हैं। पढ़ी-लिखी बड़ी बेटी चुन्नी साहू नगर पालिका परिषद कुम्हारी में पार्षद रह चुकी ​हैं।

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