मशहूर साहित्यकार विनोद कुमार शुक्‍ल का राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार, हिंदी निबंध में हुए थे फेल, मां की प्रेरणा ने बनाया महान साहित्यकार

रायपुर। मशहूर साहित्यकार विनोद कुमार शुक्‍ल का लंबी बीमारी के बाद 88 साल की उम्र में मंगलवार को निधन हो गया. आज राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्म लेने वाले विनोद कुमार शुक्ल की जिंदगी का सफर हमेशा ही लोगों के लिए प्रेरणादायक रहा है. एक साल पहले ही उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया था, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि एक वक्त था, जब खुद विनोद कुमार शुक्ल अपने कॉलेज टाइम के दौरान हिंदी के निबंध में ही फेल हो गए थे.

विनोद कुमार शुक्ल जब B.Sc की पढ़ाई कर रहे थे, उस दौरान वे हिंदी निबंध और ऑर्गेनिक कमेस्ट्री में फेल हो गए थे. इसके कारण उनके टीचर ने बहुत डांटा था. टीचर ने शुक्ल से कहा कि तुम क्या लिखते हो समझ में नहीं आता है. टीचर की बातों का विनोद कुमार शुक्ल के मन पर गहरा प्रभाव पड़ा. उन्हें उस वक्त बहुत बुरा लगा कि वे हिंदी के निबंध में फेल हो गए. इसके बाद उन्होंने हिंदी भाषा को गहराई से समझने का प्रण लिया.

मां के दिए पैसों से खरीदी पहली किताब ‘विजया’

टीचर की डांट की बात विनोद कुमार शुक्ल ने अपनी मां रुक्मिणी शुक्ल को बताई. इसके बाद मां ने विनोद कुमार शुक्ल को लिखने की प्रेरणा दी. मां के दिए हुए पैसों से ही उन्होंने अपनी पहली किताब प्रसिद्ध उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की ‘विजया’ खरीदी. इसके बाद फिर उन्होंने मुड़कर नहीं देखा और कई प्रसिद्ध उपन्यासों और कहानियों को लिख दिया, जो कालजयी बन गईं.

हरिशंकर परसाई जैसे लेखक रहे हैं प्रशंसक

विनोद कुमार शुक्ल की रचनाओं के आम लोग नहीं बल्कि कई दूसरे दिग्गज साहित्यकार भी प्रशंसक रहे हैं. गजानन माधव मुक्तिबोध और हरिशंकर परसाई जैसे दिग्गजों ने भी शुक्ल की कविताओं की तारीफ की है. मुक्तिबोध के जरिए ही शुक्ल की पहली कविता साहित्यिक पत्रिका कृति में प्रकाशित हुई थी.

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक

विनोद कुमार शुक्ल के निधन के बाद साहित्य जगत में शोक की लहर है. शुक्ल के निधन पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी शोक जताया है. पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है. हिन्दी साहित्य जगत में अपने अमूल्य योगदान के लिए वे हमेशा स्मरणीय रहेंगे. शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं.

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