बिलासपुर। बिलासपुर में श्रवण सूर्यवंशी की पुलिस कस्टडी में हुई मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है। यह राशि चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता के बैंक खाते में जमा करनी होगी। अंतिम मुआवजे का निर्धारण याचिका की अंतिम सुनवाई के दौरान किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान हिरासत में हुई हिंसा के लिए जो भी अधिकारी जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

2024 में हिरासत के बाद हुई थी मौत
श्रवण सूर्यवंशी को बिलासपुर के सीपत थाना पुलिस ने 18 जनवरी 2024 को कच्ची महुआ शराब रखने के आरोप में हिरासत में लिया था। आरोप था कि उसने अपनी किराना दुकान के सामने करीब 1,200 रुपये कीमत की कच्ची महुआ शराब बिक्री के लिए रखी थी। हिरासत में लिए जाने के तीन दिन बाद 21 जनवरी 2024 को अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
मौत के बाद जेल अधीक्षक ने 22 जनवरी 2024 को सेशन जज को पत्र लिखकर न्यायिक जांच की मांग की थी। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने मामले की जांच शुरू की और जुलाई 2024 में रिपोर्ट प्रस्तुत की। न्यायिक जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि भोथरे हथियार से सिर में लगी चोट के बाद हुई जटिलताओं के कारण श्रवण की मौत हुई।
ढाई साल बाद FIR पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया गया कि इस मामले में 30 जुलाई 2026 को FIR दर्ज की गई, यानी श्रवण की मौत के करीब ढाई साल बाद। FIR में हुई देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
कोर्ट ने कहा कि CBI केवल श्रवण की मौत की परिस्थितियों की जांच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी जांच करेगी कि न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य के अधिकारियों ने उचित कार्रवाई क्यों नहीं की।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे परिजन
श्रवण की पत्नी और उनकी दो बेटियों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले की निष्पक्ष जांच और 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। हाईकोर्ट ने परिवार को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन FIR दर्ज करने या स्वतंत्र जांच के निर्देश नहीं दिए गए।इसके बाद परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने पहली ही सुनवाई के दौरान एक लाख रुपये के मुआवजे को बेहद कम बताया था।
CBI को नियमित आपराधिक केस दर्ज कर जांच के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने CBI को नियमित आपराधिक मामला दर्ज कर जांच करने और जांच की जिम्मेदारी किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जांच जल्द पूरी करने को कहा है। साथ ही छत्तीसगढ़ के DGP को निर्देश दिया गया है कि मामले से संबंधित सभी रिकॉर्ड एक सप्ताह के भीतर विशेष दूत के जरिए CBI निदेशक को सौंपे जाएं।
मामले में CBI जांच अधिकारी की रिपोर्ट 13 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश की जाएगी।

